झारखंड में आज से राशन कार्ड सफाई अभियान, लिस्ट से हटेंगे 2.87 लाख साइलेंट और डुप्लीकेट लाभुक
झारखंड में खाद्य आपूर्ति विभाग 1 अक्टूबर से राशन कार्ड सूची से अपात्र लाभुकों को हटाना शुरू करेगा। पहले चरण ...और पढ़ें

झारखंड में आज से राशन कार्ड सफाई अभियान (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
1 अक्टूबर से राशन कार्ड सूची से अपात्र लाभुक हटेंगे।
2.87 लाख साइलेंट और डुप्लीकेट लाभुकों की पहचान की गई।
हटाए गए नामों की जगह प्रतीक्षा सूची से नए नाम जुड़ेंगे।
राज्य ब्यूरो, रांची। केंद्र सरकार के निर्देश पर झारखंड में खाद्य आपूर्ति विभाग अपात्र लाभुकों को सूची से हटाने का काम गुरुवार एक अक्टूबर से शुरू कर देगा। इसके तहत पहले चरण में साइलेंट लाभुक और डुप्लीकेट लाभुकों का नाम सूची से हटाना है।
केंद्र सरकार की ओर से भेजी गई सूची के अनुसार राज्य में 1,77,751 साइलेंट लाभुक हैं और 1,10,142 डुप्लीकेट लाभुक हैं। सभी को लाभुकों की सूची से हटाने का काम अगले एक महीने तक चलेगा। अच्छी बात यह है कि जितने नाम कटेंगे उतने ही नाम प्रतीक्षा सूची से जोड़ दिए जाएंगे।
कौन कहलाते हैं साइलेंट लाभुक
साइलेंट लाभुक वे राशन कार्डधारक कहलाते हैं जो लंबे समय से जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत अपने हिस्से का सरकारी राशन नहीं उठा रहे हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो इनका राशन कार्ड तो सक्रिय होता है, लेकिन वे राशन दुकान (पीडीएस डीलर) से अनाज लेने नहीं जाते हैं। सरकार द्वारा ऐसे लाभार्थियों को चिह्नित करने के लिए यह नाम दिया गया है, ताकि राशन वितरण व्यवस्था में सुधार किया जा सके।
कई बार लोग रोजगार या अन्य कारणों से अपने मूल निवास स्थान को छोड़कर दूसरे राज्यों या शहरों में चले जाते हैं और वहां से राशन नहीं लेते हैं। इन्हें भी साइलेंट लाभुकों की श्रेणी में रखा जाता है।
दूसरी ओर, एक अहम कारण यह भी है कि समय के साथ कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो जाता है और ऐसे लोग इसी कारण से पीडीएस दुकान पर जाना बंद कर देते हैं। कई बार फर्जी कार्डधारक भी पकड़े जाने की डर से राशन लाने के लिए पीडीएस दुकानों पर जाना बंद कर देते हैं। इसके बाद एक अहम कारण लाभुकों की मौत को भी माना जाता है। झारखंड में सरकार ने तय किया है कि छह महीने या इससे अधिक समय तक राशन लेने के लिए नहीं पहुंचनेवाले लाभुकों को साइलेंट माना जाएगा। ऐसे लोगों के लिए ई-केवाइसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
डुप्लीकेट लाभुकों का नाम हटेगा
डेटा एंट्री या किसी अन्य तकनीकी गड़बड़ी के कारण एक ही व्यक्ति का नाम सूची में दो बार आ जाने से लाभुक बने लोगों को डुप्लीकेट लाभुक माना जाता है। ऐसे लोग घर बनाने से लेकर खेती तक के लिए केंद्र और राज्य सरकार की दो अलग-अलग योजनाओं से एक साथ लाभ उठाते हैं। आधार सीडिंग के माध्यम से ऐसे लाभुकों के नामों को आसानी से पकड़ा जाता है। झारखंड में ऐसे लाभुकों की संख्या एक लाख दस हजार से अधिक है।
