रांची, जासं। झारखंड आदिवासी लोहरा समाज के अध्यक्ष बालमुकुंद लोहरा ने कहा है कि झारखंड में लोहरा समाज की उपेक्षा हो रही है। एक भी राजनीतिक दल लोहरा समाज के उत्थान के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रहा है। यही कारण है कि आजादी के सात दशक बीतने के बावजूद लोहरा समाज संविधान प्रदत अधिकारों से वंचित है। वे मंगलवार को प्रेस क्लब में आयोजित लोहरा समाज के स्थापना दिवस पर बोल रहे थे।

समाज के स्थापना दिवस को एकता दिवस के रूप में मनाया गया। इसमें समाज के काफी लोग शामिल हुए। इस अवसर पर समाज की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। आपसी चर्चा के नौ सूत्री प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें अपने अधिकार को लेकर आंदोलन करने, लोहरा जाति को अन्य जनजाति की तरह जाति प्रमाण पत्र मुहैया कराने, लोहरा समाज की जमीन को सीएनटी एक्ट के अधीन लाने आदि की मांग की गई।

कार्यक्रम में महासचिव अभय भुटकुंवर, सिद्दू इंदवर, बालकुम लोहरा, नागेश्वर लोहरा, संतलाल लोहरा, बजरंग लोहरा, प्रीतम सांड, लोहरा लोहरा रामसुंदर लोहरा, उमेश लोहरा, बालेश्वर तिर्की, पारस लोहरा, कैलाश लोहरा, बैजू लोहरा, मोहित लोहरा, दीपक लोहरा, श्रवण लोहरा, अजय लोहरा, तेजू लोहरा, विकी लोहरा, भरत लोहरा, सुरेंद्र लोहरा, जितेंद्र लोहरा आदि उपस्थित थे।

समाज की ये हैं प्रमुख घोषणाएं व मांग

  • लोहरा जनजाति को राजनीतिक दलों ने सिर्फ ठगा। संविधान प्रदत्त अधिकार प्राप्त करने के लिए जनआंदोलन किया जाएगा।
  • लोहरा जनजाति के आर्थिक विकास के लिए सरकार विशेष योजना बनाए
  • लोहरा समाज की जमीन की खरीद बिक्री में सीएनटी एक्ट की सुविधा लागू करे
  • राज्य सरकार अलग सरना धर्म कोड का प्रस्ताव विधानसभा से पास कर केंद्र को भेजे
  • कोरोना संक्रमण से उपजे हालात सामान्य होने पर आदिवासी लोहरा समाज के केंद्रीय से लेकर पंचायत स्तर तक के कार्यकारिणी का पुनर्गठन होगा, चुनाव प्रभारी के रूप में सिद्दू इंदवार, बालमुकुंद लोहरा, संतलाल लोहरा, हरख लोहरा, उमेश लोहरा पारस  लोहरा कार्य करेंगे
  • अगर छह माह के अंदर राज्य सरकार विकास की योजना नहीं बनाई तो समाज कोर्ट जाएगा।
  • अप्रैल 2021 में आदिवासी लोहरा समाज के द्वारा सरहुल पर भव्य मिलन समारोह का आयोजन होगा।

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