झारखंड में फिर 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की आहट, परिमल नथवाणी की एंट्री से सियासी हलचल तेज
राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी को एनडीए के समर्थन से झारखंड में सियासी हलचल तेज हो गई है।
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झारखंड राज्यसभा चुनाव।
HighLights
राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी को एनडीए का समर्थन।
सत्तारूढ़ गठबंधन में विधायकों की सेंधमारी का डर।
विधायकों को एकजुट रखने के लिए रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की तैयारी।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्यसभा चुनाव में एनडीए के पास आवश्यक संख्या बल नहीं होने के बाद भी निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी को समर्थन देने देने से राज्य में सियासी हलचल अचानक बढ़ गई है।
अब सभी दल अपना-अपना कुनबा समेटने में जुट गए हैं। सबसे अधिक बेचैनी कांग्रेस और राजद के भीतर है।इन दोनों दलों को अपना कुनबा बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है।
कांग्रेस में पहले से ही असंतोष की भावनाएं सामने आती रही हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन अपने दोनों प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए सेंधमारी की किसी भी समस्या को खत्म करना चाहेगा।सो, शीघ्र ही रिजार्ट पालिटिक्स भी देखने को मिल सकती है।
सत्तारूढ़ विधायकों का मिलेगा साथ
परिमल नथवाणी कह चुके हैं कि उन्हें सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों का भी साथ मिलेगा। उन्हें एनडीए के विधायकों के अलावा चार अन्य विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
यदि जेएलकेएम के विधायक जयराम महतो उन्हें समर्थन देते हैं तो उन्हें सत्तारूढ़ गठबंधन के तीन विधायकों के वोट हर हाल में प्राप्त करने होंगे। इस कारण सत्तारूढ़ गठबंधन में सेंधमारी की संभावना मतदान के दिन 18 जून तक बनी रहेगी।
तेलंगाना पहली पसंद
चर्चा है कि इस संभावना को खत्म करने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दलों के विधायकों को दक्षिण के किसी राज्य में ले जाया जा सकता है। तेलंगाना पहली पसंद होगी।
बताते चलें कि झारखंड में रिजार्ट पालिटिक्स का इतिहास भी रहा है। फरवरी-2024 में विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले सत्तारूढ़ झामुमो और कांग्रेस के विधायकों को हैदराबाद ले जाया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद उत्पन्न राजनीतिक अनिश्चितता के माहौल में गठबंधन सरकार ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए यह कदम उठाया था।
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