यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 28, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jharkhand: झामुमो के निशाने पर फिर आया राजभवन, भाजपा के इशारे पर काम करने का लगाया आरोप
JMM ने एक बार फिर राजभवन को निशाने पर लिया है। आरोप है कि राजभवन भाजपा के इशारे पर काम ...और पढ़ें

HighLights
- JMM का आरोप है कि राजभवन भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।
राज्य ब्यूरो, रांची। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने एक बार फिर राजभवन को निशाने पर लिया है। मोर्चे का आरोप है कि राजभवन भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।
यह परंपरा रही है कि जिस विधेयक में राज्यपाल के द्वारा स्वीकृति में कहीं कोई दिक्कतें आ रही हैं तो राज्यपाल सचिवालय राज्यपाल का एक संदेश भेजते हैं।
तत्कालीन राज्यपाल को विधानसभा से स्थानीय व्यक्तियों की झारखंड परिभाषा, झारखंड हिंसा एवं मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक और पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को सरकारी नौकरी के लिए आरक्षण की सीमा 27% करने संबंधी विधेयक- 2022 भेजा गया तो उसे राज्यपाल का संदेश संलग्न किए बगैर अस्वीकृत कर राज्य सरकार को भेज दिया गया।
यह भारत के संविधान के विपरीत है। इसके लिए राज्यपाल सचिवालय को गंभीर होना पड़ेगा। तीनों विधेयक सरकार को वापस किये गये, उसे विधानसभा सचिवालय को एक संदेश के साथ भेजें ताकि उस संदेश में आवश्यक संशोधन कर राजपाल को स्वीकृति के लिए भेजा जा सके।
कौन है राजभवन में जो चाहता है टकराव
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु ने जब सीएनटी-एसपीटी एक्ट से संबंधित विधेयक को वापस लौटाया था तो उसमें उनका संदेश भी संलग्न था। गवर्नर चार स्थितियों में काम करते हैं।
पहला या तो वे विधेयक को अपनी सहमति प्रदान कर दें या उसमें कुछ त्रुटियां लगती हैं तो उसे विधानसभा को अवगत करवाते हैं या विधेयक पर विचार करने के लिए विशेषज्ञों की राय ले सकते हैं या फिर अंतिम निर्णय के लिए राष्ट्रपति के कार्यालय को भेज सकते हैं।
राज्यपाल का संदेश न भेजने को लेकर उन्होंने कहा कि राज्यपाल सचिवालय में कौन है जो राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव चाहता है?
मानसून सत्र में किया जाएगा पेश
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जनता की जो आकांक्षा है, उसे इस मानसून सत्र में फिर से पेश किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक है कि विधानसभा सचिवालय को राज्यपाल का संदेश भेजा जाए नहीं तो यह समझा जाएगा कि भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर तीनों विधेयकों को जानबूझकर रोका जा रहा है।
