रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand News झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीयता नीति के निर्धारण संबंधी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की घोषणा को न्यायालय की अवमानना करार दिया है। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब रघुवर दास ने ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने को लेकर भी राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ओबीसी का आरक्षण बगैर आर्थिक सर्वे के बढ़ाना असंवैधानिक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में 29 हजार करोड़ से अधिक का अवैध उत्खनन हुआ है। एक ही परिवार के खाते में सारा पैसा गया है। केंद्रीय एजेंसियों को इसपर संज्ञान लेना चाहिए। जनता इससे आक्रोशित है। रघुवर दास ने कहा कि राज्य गठन के बाद लागू की गई स्थानीयता नीति के संकल्प को उच्च न्यायालय ने दो बार गलत ठहराया। उन्होंने अपने शासनकाल में दो बार सर्वदलीय बैठक बुलाकर सबके सुझाव लिए और 1985 को कट आफ डेट बनाया। यानी 30 वर्ष से राज्य में रहने वाले लोगों को स्थानीयता की परिधि में लाया गया।

उन्‍होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्थानीयता के लिए 1932 के खतियान को लागू करने की बाध्यता कर न्यायालय का अपमान किया है। 1985 के कट आफ डेट पर विवाद नहीं है। राज्य सरकार स्थानीयता नीति को भटकाना और उलझाना चाहती है। ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने को उन्होंने असंवैधानिक बताते हुए कहा कि इसके लिए आर्थिक सर्वे को आधार बनाना आवश्यक है। उनकी सरकार ने इसके लिए सभी जिला उपायुक्तों को पत्र भेजा था। हेमंत सरकार का यह कदम आदिवासी-मूलवासी के लिए धोखा है।

रघुवर दास ने कहा कि भाजपा पिछड़ों के आरक्षण की पक्षधर है, लेकिन इसके लिए सर्वे को आधार बनाना चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछड़ों के आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट पूरी हुई है अथवा नहीं। अगर रिपोर्ट नहीं बनी है तो इसे तैयार कराना चाहिए। सरकार इसको लेकर स्थिति स्पष्ट करे। हेमंत सोरेन को बयानवीर बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हर वर्ष पांच लाख नौकरियां देने का वादा किया था। इसे लेकर वे स्थिति स्पष्ट करें। मुख्यमंत्री का पूरा परिवार केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर है।

रघुवर दास आदिवासी, मूलवासी और पिछड़ों के विरोधी : झामुमो

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीयता नीति परिभाषित करने को असंवैधानिक ठहराने पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गहरी आपत्ति जताई है। झामुमो की केंद्रीय समिति के सदस्य विनोद पांडेय ने कहा कि हेमंत सरकार की बढ़ती लोकप्रियता और कल्याणकारी काम को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बौखला गए हैं। उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बढ़ती लोकप्रियता नहीं पच रही है। भाजपा के अन्य नेताओं का भी यही हाल है, जो पिछले चुनाव में जनता द्वारा नकार दिए जाने के बाद हतोत्साहित हैं और हेमंत सरकार के खिलाफ लगातार भ्रम फैला रहे हैं।

विनोद पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आदिवासी, मूलवासी और पिछड़ों के विरोधी हैं। यही वजह है कि उन्हें राज्य के लोगों के हित में लिया गया निर्णय असंवैधानिक लग रहा है। वे पिछड़ों का आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने के विरोधी हैं। उनके इस रुख से भाजपा का झारखंड के प्रति रवैया जनता की समझ में आ रहा है। रघुवर दास ने अपने शासनकाल में भी झारखंड के हितों की लगातार अवहेलना की और आदिवासी, मूलवासी और पिछड़ों का दबाने की पूरी कोशिश की।

झामुमो नेता ने कहा कि रघुवर दास के शासनकाल में राज्य में भुखमरी की घटनाएं हुई। उन्हें इसके लिए राज्य के लोगों से माफी मांगना चाहिए। वे अनाप-शनाप बोलकर ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए वे चुनाव हार गए। रघुवर दास सामंती मानसिकता के हैं और वे एक आदिवासी को मुख्यमंत्री के पद पर नहीं देखना चाहते। उनके कार्यकाल में हुए कई घोटालों की जांच चल रही है।

Edited By: Alok Shahi