रांची, (राज्य ब्यूरो)। Jharkhand News : झारखंड पुलिस एसोसिएशन (Jharkhand Police Association) ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ( Hemant Soren) को तीन अलग-अलग पत्र लिखकर अपनी लंबित मांगों से अवगत कराया है। एसोसिएशन अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। एसोसिएशन की मांगों में सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा (Limited Departmental Competitive Examination) की अधिसूचित नियमावली को समाप्त करना, सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की अनुशंसा के अनुसार भत्ता देना व 20 दिनों का क्षतिपूर्ति अवकाश लागू करना शामिल है।

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को कराया है अवगत

एसोसिएशन ने अपने पत्र में बताया है कि सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा की अधिसूचित नियमावली के समाप्त नहीं होने से सहायक अवर निरीक्षक कोटि के पदाधिकारियों की प्रोन्नति नहीं हो पा रही है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उन्होंने सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा नियमावली की समाप्ति के लिए सहमति दी थी, लेकिन अब तक नियमावली समाप्ति संबंधित आदेश जारी नहीं हो सका है।

प्रोन्नति से पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता पर भी अनुकूल प्रभाव

इस नियमावली की समाप्ति से झारखंड पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। साथ ही पुलिसकर्मियों की त्वरित प्रोन्नति से पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। एसोसिएशन ने मांगें नहीं मांगे जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुरूप भत्ता लागू करने की मांग 

झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने सरकार को यह जानकारी दी है कि सातवें वेतन आयोग के अनुसार मिलने वाले भत्ते के संबंध में पूर्व में वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार सातवें वेतन आयोग के आलोक में पुलिसकर्मियों को मिलने वाले सभी भत्ते जैसे वर्दी, दुरुह कार्य भत्ता, वाहन रख-रखाव भत्ता, विशेष भोज्य भत्ता, प्रशिक्षण भत्ता के मामले वर्तमान सरकार के पास विचाराधीन है। अब तक इस मामले में सरकार के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

वापस मांगा 20 दिनों का क्षतिपूर्ति अवकाश

झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने 13 माह के वेतन के बदले 20 दिनों के क्षतिपूर्ति अवकाश को काटने संबंधित सरकार के निर्णय का भी विरोध किया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि 13 माह का वेतन देने के बदले काटे गए 20 दिनों के क्षतिपूर्ति अवकाश को वापस किया जाय।

Edited By: Sanjay Kumar