रांची, जासं। झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (जेपीडीए) द्वारा राज्य सरकार से पुनः मांग की गई है कि डीजल पर वैट की दर 22 प्रतिशत से घटाकर 17 प्रतिशत कर दी जाए। इस आग्रह को लेकर जेपीडीए के एक प्रतिनिधिमंडल ने संगठन के अध्यक्ष अशोक सिंह की अगुवाई में मंत्री आलमगीर आलम के आवास में हो रही विधायक दल की बैठक के दौरान वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव और मंत्री आलमगीर आलम को सयुंक्त रूप से झारखंड में डीजल पर वैट की दर घटाने के संदर्भ में एक मांग पत्र सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल में जेपीडीए के अनूप संथालिया और प्रवक्ता प्रमोद कुमार भी शामिल रहे। मांग पत्र के माध्यम से एसोसिएशन का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार एवं ओडिशा द्वारा वैट दर घटाए जाने की घोषणा से डीलरों में चिंता व्याप्त हो गई है। क्योंकि पड़ोसी राज्यों द्वारा कटौती किए जाने से झारखंड में बिक्री घट रही है। जेपीडीए अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि इस वजह से उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा से आने वाली मालवाहक गाड़ियां झारखंड के बॉर्डर में घुसने से पहले ही उन राज्यों में डीजल भरवा लेती हैं।

इससे राज्य के सीमा पर स्थित पेट्रोल पंपों की स्थिति खराब है। ऐसे में राज्य सरकर वैट में पांच प्रतिशत की कमी करती है, तो काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि रिटेल आउटलेट पर पहले डीजल पर वैट की दर 18 प्रतिशत थी। पिछली सरकार ने इसे 24 फरवरी, 2015 से बढ़ाकर 22 प्रतिशत कर दिया। उसके बाद से डीजल की बिक्री में धीरे-धीरे गिरावट आने लगी। इसे आप आंकड़ों से आसानी से समझ सकते हैं। फरवरी, 2015 में जहां डीजल की बिक्री की मात्रा 1,45, 000 केएल थी, जो धीरे-धीरे घटकर अब 1,23,000 केएल हो गई है।

गणना करने पर हम देख सकते हैं कि एनएच-19 पर सिर्फ चार जिलों की कुल बिक्री 26612 केएल हुआ करती थी। वह अब घटकर 9981 केएल हो गई है, जो लगभग 62 प्रतिशत की गिरावट है। यदि वैट की दर कम कर दी जाती है, तो यह बिक्री तुरंत वापस आ जाएगी। बता दें कि झारखंड में पेट्रोल पर 22 प्रतिशत वैट या 17 रुपये प्रति लीटर दोनों में जो अधिक हो और डीजल पर 22 प्रतिशत वैट या 12.50 रुपये प्रति लीटर दोनों में से जो अधिक हो, टैक्स लगता है। इसके अलावा दोनों पर अतिरिक्त एक रुपये का सेस भी है।

Edited By: Sujeet Kumar Suman

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