रांची, राज्य ब्यूरो। Threats to Ban Pan Masala Companies झारखंड में पिछले दो साल से प्रतिबंधित 11 पान मसाला ब्रांड कंपनियों के कई संचालक इन दिनों भयादोहन से परेशान हैं। उन्हें प्राथमिकी व कार्यवाही के नाम पर धमकाया जा रहा है। कुछ तो भयादोहन से दहशत में हैं तो कुछ जल्द ही न्यायालय की शरण में जाने का मन बना चुके हैं। उनका सीधा आरोप सामाजिक कार्यकर्ता, पुलिस व मीडिया से जुड़े कुछ लोगों पर है, जिन्होंने उन्हें भयादोहन करने की कोशिश की है। इसे लेकर ऐसे पीड़ित निर्माताओं ने दिल्ली पुलिस, ईडी व सीबीआइ में भी शिकायत की है और ऐसे गिरोह का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।

उनका कहना है कि प्रतिबंध झारखंड में है, लेकिन कुछ गिरोह उन्हें समन भिजवाकर झारखंड पुलिस, ईडी, आयकर विभाग, सीबीआइ आदि एजेंसियों के चंगुल में फंसने का डर दिखाता है और इसके जरिये उगाही की कोशिश कर रहा है। उन्हें आशंका है कि इस रैकेट में राज्य के बड़े राजनेता व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

झारखंड में जिन 11 पान मसाला ब्रांड पर प्रतिबंध है, उनमें पान पराग, शिखर, रजनीगंधा, दिलरुबा, राज निवास, मुसाफिर, मधु, विमल, बहार, सेहरत व पान पराग प्रीमियम शामिल हैं। राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार बनने के बाद वर्ष 2020 में इन पान मसाला, गुटखा ब्रांड पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया था। इन ब्रांड के पान मसाला, गुटखा को तय मानक के अनुरुप नहीं पाया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रतिबंध लगाया और इसे रोकने की जिम्मेदारी सभी जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को दी गई।

इन अधिकारियों ने दो वर्षों में ऐसे ब्रांड के पान मसाला को पकड़ा, इनके मामले में प्राथमिकियां भी दर्ज कराई और जुर्माना भी वसूला। कई मामले न्यायालय में विचाराधीन भी हैं। इसी बीच यह सूचना सामने आ रही है कि इन कंपनियों के संचालकों से कार्रवाई व प्राथमिकी के नाम पर भी संपर्क किया जा रहा है और केस को रफा दफा करने, कराने के नाम पर भयादोहन किया जा रहा है।

दूसरे राज्यों में उनका उत्पाद बैन नहीं, तो कंपनी के संचालक दोषी कैसे, दे रहे हैं तर्क

कंपनी के संचालकों का तर्क है कि उनके उत्पाद केवल झारखंड में बैन हैं, जबकि उनका उत्पाद पड़ोसी राज्य में बिक रहा है। अब कोई चोरी-छुपे उनके उत्पाद को झारखंड में बेचते पकड़ा गया तो उसके कंपनी संचालक दोषी कैसे, उसपर प्राथमिकी क्यों। कंपनी संचालकों का कहना है कि झारखंड में एक गिरोह सक्रिय है, जो अपने तस्करों के माध्यम से चोरी-छिपे पान मसाला मंगवाकर बिकवा रहा है। गाहे-बगाहे स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से कुछ फुटकर विक्रेताओं पर छापा मरवाकर उस मुकदमे में दिल्ली एनसीआर के बड़े पान मसाला निर्माताओं का नाम उस शिकायत में डलवाकर उनसे मोटी रकम वसूलने की कोशिश कर रहा है। अगर झारखंड में प्रतिबंध के बावजूद वहां पान मसाला बिक रहा है तो उसके लिए यहां की स्थानीय पुलिस जिम्मेदार है।

पूरे झारखंड में हुई कार्रवाई, दर्जनों प्राथमिकियां भी दर्ज

पिछले दो साल से राज्य में 11 ब्रांड के पान मसाला व गुटखा प्रतिबंधित हैं। इनके विरुद्ध जिलों में केस दर्ज भी हुए और जुर्माने की वसूली भी हुई है। अब नई जानकारी सामने आई है कि इस मामले में पान मसाला बनाने वाली कंपनियों व उनके मालिकों को भी कटघरे में खड़ा करने के लिए हाई कोर्ट में पीआइएल दायर होने वाला है। लोहरदगा जिले में दो साल के भीतर 32 दुकानदारों से प्रतिबंधित पान मसाला बेचने के मामले में दो लाख, छह हजार दो सौ रुपये का जुर्माना वसूल किया गया। इससे संबंधित तीन मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।

साहिबगंज में कुल 14 मामले सामने आए हैं, जिनमें दस मामलों में सीजेएम कोर्ट में केस दर्ज हो चुका है। चार पर केस दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। दुमका में पांच पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई और एक दर्जन से अधिक कारोबारियों को आर्थिक दंड लगाया गया, गोड्डा में चार दर्जन से अधिक कारोबारियों से डेढ़ लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया और नगर थाने में एक प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई।

धनबाद में कोई मामला सामने नहीं आया। गिरिडीह में तीन आरोपितों पर प्राथमिकी दर्ज है। चतरा में दो वर्षों में 10 दुकानदारों पर जुर्माना लगाया गया और अब तक करीब 3.21 लाख रुपये की जुर्माना वसूली हुई। सिमडेगा में वर्ष 2019-20 में चार पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। वहीं 2020-21 में 15 लोगों से 105500 तथा 2021-22 में 15 लोगों से 262000 रुपये जुर्माना के रूप में वसूले गए।

बाेकारो में कोई मामला सामने नहीं आया है। गढ़वा में छह माह में गुटखा गढ़वा में तीन लोगों के विरुद्ध केस दर्ज करते हुए 32 हजार रुपये जुर्माना वसूले गए। पाकुड़ में जिले में 15 मामले आए, जिनमें एक पर मामला दर्ज हुआ, बाकी को आर्थिक जुर्माना लगाकर छोड़ा गया। सरायकेला में पिछले दो वर्षों में चार प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि 60 हजार जुर्माना वसूला गया। पलामू में दो साल में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पश्चिमी सिंहभूम जिले में प्रतिबंधित पान मसाला बेचने के मामले में वर्ष 2020 में 10 मामले अलग-अलग थानों में दर्ज किये गये। इनमें से 9 में चार्जशीट दाखिल कर दी गयी है। एक मामले में अनुसंधान जारी है। वहीं 2021 में तीन प्राथमिकियां दर्ज हुई हैं। दो केस में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। एक मामले में जांच जारी हे। वर्ष 2022 में अभी तक प्रतिबंधित पान मसाला बेचने के मामले में एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। पूर्वी सिंहभूम में पांच दुकानदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, सभी जमानत पर हैं।

Edited By: Sanjay Kumar