रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand News अवैध खनन से 1000 करोड़ रुपये के मनी लांड्रिंग मामले में ईडी ने पिछले दिनों ईडी की विशेष अदालत में दाखिल अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) में इस बात का खुलासा किया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर उनके करीबी प्रेम प्रकाश ने संताल से अवैध खनन का रुपया मंगवाया और कोलकाता के व्यवसायी अमित अग्रवाल को दिया। ईडी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा से निष्कासित पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रवि केजरीवाल के बयान के आधार पर इस तथ्य का अपनी चार्जशीट में उल्लेख किया है। रवि केजरीवाल झारखंड मुक्ति मोर्चा का कोषाध्यक्ष रहा है। ईडी ने गत 21 जुलाई को उनका बयान कलमबद्ध किया था।

ईडी ने चार्जशीट में बताया है कि रवि केजरीवाल ने यह भी बताया कि वह एक दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ उनके कार्यालय में बैठा था, जहां हेमंत सोरेन ने पंकज मिश्रा को सीधे तौर पर निर्देशित किया कि संताल के क्षेत्रों से पत्थर व बालू खनन से आने वाले रुपयों को वह प्रेम प्रकाश को दे। इसके बाद यह तय हुआ कि उक्त राशि लेने के बाद प्रेम प्रकाश उसे व्यवसायी अमित अग्रवाल को दे देगा।

पंकज मिश्रा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बरहेट विधानसभा क्षेत्र का विधायक प्रतिनिधि है, जिसे ईडी ने अवैध खनन के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वहीं, अमित अग्रवाल कोलकाता का व्यवसायी है। रवि केजरीवाल ने आगे यह भी बताया था कि प्रेम प्रकाश ने मुख्यमंत्री व व्यवसायी अमित अग्रवाल का करीबी होने का पूरा लाभ उठाया। वह मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू का भी करीबी है।

रवि केजरीवाल ने ईडी को यह भी बताया था कि पूजा सिंघल को खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिलाने में भी व्यवसायी अमित अग्रवाल की अहम भूमिका थी। रवि केजरीवाल के अनुसार प्रेम प्रकाश पहले मध्याह्न भोजन में अंडा आपूर्ति का ठेका लेता था। बाद में उसने नेताओं व नौकरशाहों में पकड़ मजबूत कर ली और उसकी बदौलत भारी मात्रा में रुपयों का लेन-देन किया।

अधिवक्ता राजीव कुमार को 50 लाख रुपये के साथ अमित अग्रवाल ने ही फंसाया

रवि केजरीवाल ने ईडी को कोलकाता के जिस व्यवसायी अमित अग्रवाल के बारे में बताया है यह वही अमित अग्रवाल है, जिसने झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता को 50 लाख रुपये के साथ फंसाया था। गत 31 जुलाई को अमित अग्रवाल ने कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में अधिवक्ता राजीव कुमार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी और बताया था कि एक जनहित याचिका को मैनेज करने के नाम पर अधिवक्ता ने एक करोड़ रुपये की मांग की है, जिसकी पहली किश्त के रूप में उन्होंने 50 लाख रुपये मांगा है। बंगाल पुलिस व अमित अग्रवाल ने मिलकर एक जाल बिछाया, जिसमें कोलकाता पहुंचे अधिवक्ता राजीव कुमार को फंसाया गया था।

Edited By: Alok Shahi