रांची, जेएनएन। Jharkhand News झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन पर लगातार हमला बोल रहे भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने ट्विटर पर आज फिर बड़ा दावा करते हुए सरकार में सनसनी मचा दी। भाजपा नेता ने कहा है कि ईडी हेमंत सोरेन के सचिव से पूछताछ करने वाली है। निशिकांत ने अपने ट्वीट में लिखा- जानकारी के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय, ईडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री के सचिव को बुलाने का निर्णय लिया है, सचिव महोदय से 1 साल के अंदर तीन बार शराब की नीति बदलने के पीछे की कहानी उनकी जुबानी समझी जाएगी।

इधर एक और ट्वीट में सांसद ने लिखा है कि अमित के IA का क्या हुआ भाई? इ अमित बड़ा मजबूत लगता है लेकिन बुड़बक है, मैंने भी किसी अमित के बारे में दुमका में प्रेस कांफ्रेंस करके बताया था कि हेमंत सोरेन जी आप ईमानदार अधिकारी से इसकी जांच कराइए, लेकिन बदले में मेरे व परिवार के उपर 32 केस, लगता है कि यह चोर चोर मौसेरे भाई हैं?

सांसद निशिकांत का दावा, अब उत्पाद सचिव से पूछताछ करेगा ईडी

गोड्डा से भाजपा के सांसद डा. निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि ईडी की टीम बहुत जल्द उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव से पूछताछ करेगी। उन्होंने ट्वीट किया है कि झारखंड के मुख्यमंत्री के सचिव को ईडी कभी भी पूछताछ के लिए बुला सकता है। ईडी उनसे यह जानने की कोशिश करेगा कि एक साल के भीतर तीन बार शराब की नीति बदलने के पीछे की कहानी क्या है। ईडी पूरी जानकारी विनय चौबे के माध्यम से लेने का प्रयास करेगा।

पूरक हलफनामे में हाई कोर्ट में शराब नीति की दी थी जानकारी

गत माह हाई कोर्ट में मुखौटा कंपनियों से जुड़े मामले के शिकायतकर्ता शिव शंकर शर्मा ने पूरक हलफनामे में इस बात की भी जानकारी दी थी कि ईडी जिस प्रेम प्रकाश व उसके कर्मियों से पूछताछ कर रहा है, उसका गहरा संबंध कई नौकरशाहों से भी है। प्रेम प्रकाश ने उन नौकरशाहों का भी नाम अपने पूरक हलफनामे में दिया है। उसने दावा किया कि मिड डे मील की अंडा आपूर्ति का ठेका दिलवाने में एक आइएएस अधिकारी ने खूब मदद की। दावा किया गया है उक्त आइएएस अधिकारी के साथ मिलकर प्रेम प्रकाश व कुछ अन्य ने मिलकर राज्य में झारखंड वेबरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड को बर्बाद कर दिया है। अब ईडी उस पूरक हलफनामे के आधार पर भी आए तथ्यों का सत्यापन कर रहा है।

हाई कोर्ट ने कहा, छह माह में बीएयू के दैनिक कर्मियों को करें नियमित

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में दैनिक वेतन पर कार्यरत कर्मियों की सेवा नियमित करने के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बीएयू की ओर से कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए समय की मांग की गई। इस पर अदालत ने बीएयू को छह माह में दैनिक वेतन पर कार्यरत कर्मियों की सेवा नियमित करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर बीएयू के कुलपति डा ओंकार नाथ सिंह अदालत में उपस्थित हुए।

इस संबंध में मो. हुमांयू समेत अन्य की ओर से अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2019 में अदालत ने इनकी सेवा चतुर्थ वर्ग में नियमित करने का आदेश दिया था। इसके बाद भी अभी तक सेवा नियमित नहीं की गई है। बहुत दिनों से मामले को लटका कर रखा गया है। प्रार्थी 20 वर्षों से अधिक समय से दैनिक वेतन पर चतुर्थ वर्ग पद पर काम कर रहे हैं। इसके बाद अदालत ने पिछली सुनवाई को बीएयू के कुलपति को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया था।

Edited By: Alok Shahi