पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी के बाद गिरिडीह के डुमरी में होगा ताम्र अयस्क का खनन, झारखंड की नई खनन क्रांति से AI और EV को ईंधन
झारखंड के गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में भूतत्व सर्वेक्षण के बाद तांबे के अकूत भंडार की पुष्टि हुई है, ...और पढ़ें

बरगंडा, परसाबेड़ा, कोलुवा और अंबाडीह गांव में धरा के नीचे मिला अयस्क।
HighLights
गिरिडीह के डुमरी में तांबे का अकूत भंडार मिला।
भूतत्व सर्वेक्षण ने एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पुष्टि की।
वैश्विक मांग के बीच झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि।
अश्विनी रघुवंशी, रांची। झारखंड के गिरिडीह जिला के डुमरी में धरती के नीचे का तांबा का अकूत खजाना मिला है। डुमरी प्रखंड के बरगंडा समेत चार गांवों की धरा के नीचे तांबा होने का अनुमान लगाया .जाता था। अब इसकी पुष्टि हो चुकी है। अब झारखंड सरकार के भूतत्व सर्वे में तांबा अयस्क की खोज पूरी हो गई है। भूतत्व सर्वे में पाया गया कि बरगुंडा में तकरीबन एक वर्ग किलो मीटर की परिधि में तांबा अयस्क है।
धरती के नीचे से ताम्र अयस्क का नमूना तक निकाला जा चुका है। भूतत्व सर्वे की विवरणी राज्य सरकार को मिल गई है। वर्ष 2018 में झारखंड सरकार के भूतत्व विभाग को अंदाज मिल गया था कि गिरिडीह के बरगंडा गांव में ताम्र अयस्क की मौजूदगी है।
धरती की सतह के नमूने का अध्ययन किया गया। भूतत्व विभाग के हजारीबाग की प्रयोगशाला में प्रारंभिक जांच में धरती की सतह की प्रारंभिक छानबीन में ताम्र, जिंक एवं लेड के अंश पाए गए। छोटानागपुर के उप निदेशक कुणाल कौशल को प्रोजेक्ट हेड की जवाबदेही दी गई।
तीन स्थानों पर गहराई तक छेद किया गया तो उच्च कोटि का ताम्र अयस्क पाया गया। खूब जश्न मनाया गया। तत्पश्चात सर्वेक्षण कार्य को पूर्ण करने का दायित्व भारत सरकार के उपक्रम एमइसीएल को दिया गया। एमइसीएल ने हाल ही में राज्य सरकार के भूतत्व विभाग को सर्वे रिपोर्ट समर्पित कर दी है।
गुलाम भारत में ब्रिटिश सरकार ने मुसाबनी में किया था खनन
गुलाम भारत में 1923 में ब्रिटिश सरकार ने पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी में तांबा की खदान की खोज की थी। ब्रिटिश खनन कंपनी ने वहां से तांबा निकालने का काम शुरू किया था। देश की आजादी के बाद भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम हिंदुस्तान कापर लिमिटेड (एचसीएल) को मुसाबनी में ताम्र अयस्क निकालने और मऊभंडार में उसके प्रस्संकरण की जवाबदेही दी गई।
एचसीएल इस कार्य में अभी तक लगा हुआ है। संयोग है कि गुलाम भारत में ही गिरिडीह के बरगंडा में ताम्र अयस्क होने की प्रारंभिक जानकारी मिली थी। ब्रिटिश सरकार ने सर्वे कार्य शुरू किया था। वह कार्य अंजाम तक नहीं पहुंच सका था। झारखंड से बाहर भारत में मध्य प्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के खेतरी में ही ताम्र खान है। इस नजरिये से गिरिडीह में तांबा मिलना बड़ी उपलब्धि है।
-1790617822272.webp)
एआई डेटा सेंटर के लिए भारी मांग से तीन साल में 75 फीसद हो गया महंगा
एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमता के लिए बनने वाले डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पूरे विश्व में तांबा की भारी मांग है। विशेषज्ञ संस्थाओं की वेबसाइट की मानें तो एक उन्नत एआइ डाटा सेंटर बनाने के लिए 50 हजार टन तांबा की जरूरत होती है। उसे चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली चाहिए। मोटे तार के केबुल और शीत यंत्र में खूब तांबा लगता है।
विश्व स्तर पर इतनी मांग बढ़ी है कि पिछले तीन सालों में तांबा की कीमत में 75 प्रतिशत का उछाल आया है। अक्टूबर 2023 में जितने तांबा के लिए एक लाख लगते थे, अभी उतने ताम्र की कीमत पौने 2 लाख हो गई है। अभी भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में तांबा की कीमत 14 सौ रुपये किलो के आसपास है।
ऐसी परिस्थिति में गिरिडीह में खोजी गई तांबा खदान का संचालन जल्द शुरू करने की तमाम प्रक्रिया पूरी हो जाय तो गिरिडीह के साथ झारखंड राज्य के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा।
कई सालों तक लगातार मेहनत और बुद्धिमता से गिरिडीह के बरगंडा में ताम्र अयस्क की खोज का काम पूरा हो चुका है। भू सर्वे रिपोर्ट भी मिल गई है। अब उसका अध्ययन कर आगे की कार्ययोजना पर विचार किया जाएगा।
-कुमार अमिताभ, भूतत्व निदेशक, झारखंड सरकार।
