Jharkhand Maoist Free: झारखंड में नक्सलियों का खात्मा तय, कभी भी हो सकती है 'माओवादी मुक्त राज्य' की घोषणा
Saranda Naxal News: झारखंड के सारंडा में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से माओवादी कमजोर पड़ रहे हैं, जिससे उनके ...और पढ़ें

सारंडा में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से माओवादी कमजोर, झारखंड जल्द होगा माओवादी मुक्त। (फोटो: जागरण)
HighLights
सुरक्षा बलों की कार्रवाई से माओवादी लगातार कमजोर पड़े हैं।
एक वर्ष में दो दर्जन से अधिक माओवादी मारे गए।
मिसिर बेसरा का दस्ता कमजोर, आत्मसमर्पण की संभावना बढ़ी।
राज्य ब्यूरो, रांची। सारंडा में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से माओवादी कमजोर पड़ते जा रहे हैं। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। एक वर्ष के भीतर मुठभेड़ में दो दर्जन से अधिक माओवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है।
लगातार कार्रवाई व खुद को घिरता देख माओवादियों के सामने आत्मसमर्पण के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। ये राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर उसका लाभ उठाएंगे। गुरुवार को एक साथ 27 माओवादियों का सरेंडर करना अपने आप में रिकॉर्ड है। ज्यादातर कोल्हान एरिया में सक्रिय थे।
मिसिर बेसरा पड़ा अब और भी कमजोर
एक करोड़ का इनामी माओवादियों का पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अब और भी कमजोर पड़ गया है। उसके दस्ते में अब एक दर्जन के करीब माओवादी बचे हैं। पूरे सारंडा में यही एक दर्जन माओवादी अब बचे हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षा बल के जवान जुटे हैं।
सुरक्षा बलों तक खुफिया सूचना है कि मिसिर बेसरा मिसिंग है। यानी, वह दस्ता से गायब है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में वह भी आत्मसमर्पण कर सकता है। फिलहाल, उसकी घेराबंदी तेज है।
सारंडा के ये माओवादी बंगाल में आत्मसमर्पण व गिरफ्तार हो चुके हैं
सारंडा में सक्रिय रहे जोनल कमेटी सदस्य बंगाल का रहने वाला समर दा उर्फ मघाई पात्रा बंगाल में सरेंडर कर चुका है। उसपर चाईबासा में तीन केस दर्ज हैं।
वहीं, रिजनल कमेटी सदस्य बेला सरकार उर्फ आशा उर्फ दिपा सरकार उर्फ संध्या विश्वास को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार की है। वह बंगाल के नादया मुर्शीदाबाद जिले के लालगोल थाना क्षेत्र के लालगोल की रहने वाली है और उसपर चाईबासा में तीन केस दर्ज है।
तेलंगाना में भी दो माओवादियों ने किया है आत्मसमर्पण
सारंडा में सक्रिय रहे दो माओवादियों ने तेलंगाना में भी आत्मसमर्पण भी किया है। इनमें एक विश्वनाथ उर्फ संतोष उर्फ सिलाय उर्फ डोंगा उर्फ गंगाधर उर्फ नरसन्ना है, जो स्पेशल एरिया कमेटी (सैक) सदस्य है। उसपर चाईबासा में 13 कांड दर्ज हैं।
वह मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के गन्नावरम स्थित नरेंद्रपुरम का रहने वाला है। वहीं, दूसरी माओवादी उसकी पत्नी रिजनल कमेटी सदस्य पूनम उर्फ जोभा उर्फ भवानी उर्फ सुजाता है। इसपर चाईबासा में 11 कांड दर्ज हैं। यह आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पेलावरम थाना क्षेत्र के गुंटनादेवी की रहने वाली है।
