रांची, राज्य ब्यूरो। Shilpi Neha Tirkey मांडर विधानसभा उपचुनाव में बंधु तिर्की की बेटी शिल्पी नेहा तिर्की ने अपने पिता की सीट पर कब्जा बरकरार रखा है। इसके साथ ही बंधु तिर्की और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने पार्टी के भीतर भी विरोधियों को दो टूक जवाब दिया है। आय से अधिक संपत्ति मामले में सजा पाने के बाद पार्टी के अंदर और पार्टी के बाहर के विरोधियों ने बंधु के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने एक पल भी उनका साथ नहीं छोड़ा और लगातार प्रचार अभियान में जुटे रहे।

बंधु के विरोधियों ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदर्शन कर उम्मीदवारी का विरोध किया लेकिन राजेश ठाकुर की सलाह पर बंधु की बेटी को ही टिकट मिला और यह बाजी कांग्रेस ने मार ली है। मांडर उपचुनाव के पूर्व पार्टी ने गठबंधन में बड़े भाई झारखंड मुक्ति मोर्चा से भी बेहतर संपर्क बना लिया और इसका नतीजा यह निकला कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं नामांकन और प्रचार कार्यक्रम में शामिल रहे।

इसके साथ ही बंधु तिर्की ने अपने चुनावी गढ़ पर एक बार फिर से कब्जा जमा लिया है। ज्ञात हो कि मांडर विधानसभा के तत्कालीन विधायक और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की की विधायकी आय से अधिक संपत्ति के मामले में सजा मिलने के बाद चली गई थी। इससे बंधु तिर्की के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस की बदनामी तो हुई लेकिन बंधु तिर्की और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने उपचुनाव में खुद को साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

इस जीत के बाद पार्टी में उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी तय है जो टिकट मिलने के बाद और चुनाव के दौरान बंधु तिर्की का विरोध करते दिखे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि पार्टी में रहकर पार्टी के खिलाफ काम करनेवालों की अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है। किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। यह इशारा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे एक वरीय नेता के करीबियों पर है। इन्हीं नेताओं ने ना सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष का विरोध किया था बल्कि केंद्रीय नेतृत्व को भी झांसे में रखने की कोशिश की थी। नई दिल्ली में जाकर प्रदर्शन भी कर आए।

पांच महिला विधायकों के साथ कांग्रेस का नया कीर्तिमान

झारखंड में कांग्रेस के पास अब पांच महिला विधायक हैं। कांग्रेस के लिए प्रदेश में पांच महिला विधायकों का होना एक नया कीर्तिमान है। यह बात अलग है कि इनमें से चार सीधे तौर पर राजनीतिक घरानों से जुड़ी हुई हैं। दीपिका पांडेय सिंह के ससुर महगामा से विधायक रह चुके थे और दीपिका की माता ने प्रदेश भाजपा में अहम मुकाम हासिल किया था। दीपिका भी छात्र राजनीति से अपना करियर शुरू कर विधायक पद तक पहुंची हैं और उनकी पहचान झारखंड में राहुल गांधी कैंप के प्रतिनिधि के तौर पर है। अंबा प्रसाद जिस क्षेत्र से विधायक हैं वहां से उनके पिता और माता अलग-अलग समय में विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

पूर्णिमा नीरज सिंह धनबाद के चाचा ससुर झरिया से विधायक रह चुके हैं और उनके पति नीरज सिंह धनबाद में डिप्टी मेयर रह चुके थे। नीरज सिंह की हत्या के बाद कांग्रेस ने पूर्णिमा को टिकट दिया था। रामगढ़ से विधायक ममता देवी के परिवार के लोग राजनीति से जरूर जुड़े रहे हैं लेकिन परिवार से ममता ही पहली बार विधानसभा पहुंची हैं। इसी प्रकार अपने पिता बंधु तिर्की का गढ़ बचाते हुए उनकी बेटी शिल्पी नेता तिर्की ने मांडर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कर कांग्रेस के लिए कीर्तिमान बनाया है।

Edited By: Alok Shahi