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झारखंड में एलपीजी संकट पर रार; सीएम हेमंत ने केंद्र को घेरा, स्कूलों में मध्याह्न भोजन को लेकर बढ़ी चिंता 

Published: Thu, 12 Mar 2026 12:01 AM (IST)

पश्चिम एशिया युद्ध के कारण झारखंड में एलपीजी संकट गहरा गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर सवाल ...और पढ़ें

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HighLights

  1. झारखंड के 40 लाख बच्चों के मध्याह्न भोजन पर संकट।

  2. शिक्षा विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था और निगरानी का आश्वासन दिया।

राज्‍य ब्‍यूरो, रांची । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण उत्पन्न हुए एलपीजी संकट ने अब झारखंड की राजनीति और स्कूली व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। 
 
वहीं दूसरी ओर राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों के मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की निरंतरता को लेकर भी संशय के बादल मंडराने लगे हैं।

 

मुख्यमंत्री का हमला: गरीब और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित 

असम दौरे से लौटने के बाद रांची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गैस संकट के प्रबंधन पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर किसी भी बड़े संकट की आशंका होने पर संबंधित विभाग पहले ही अलर्ट जारी करते हैं, ताकि जनता मानसिक रूप से तैयार रहे। लेकिन इस मामले में संकट पहले आ जाता है और सूचना बाद में मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा क‍ि देश का आम आदमी, जो छोटी-मोटी रोजी-रोटी के सहारे परिवार चलाता है, वह पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है। मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग न खुद ठीक से खा पा रहे हैं और न दूसरों की मदद कर पा रहे हैं। 

 

पीएम पोषण योजना पर संकट? 40 लाख बच्चों का सवाल 

एलपीजी की किल्लत का सबसे संवेदनशील असर राज्य की पीएम पोषण योजना पर पड़ सकता है। झारखंड के लगभग 35 हजार सरकारी स्कूलों में करीब 40 लाख बच्चे प्रतिदिन मध्याह्न भोजन करते हैं। 
 
चूंकि अधिकांश स्कूलों में खाना गैस सिलेंडरों पर ही बनाया जाता है, इसलिए गैस की कमी सीधे तौर पर बच्चों के पोषण को प्रभावित कर सकती है। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि मध्याह्न भोजन योजना एक भी दिन बंद नहीं होनी चाहिए। 
 
ऐसे में अगर एलपीजी की किल्लत लंबी खिंचती है, तो विभाग के लिए इस आदेश का पालन करना एक बड़ी चुनौती होगी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि अभी तक राज्य में किसी भी स्कूल से गैस की कमी की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
  •     वैकल्पिक व्यवस्था: सचिव के अनुसार, चूंकि अधिकांश स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य ईंधनों (जैसे लकड़ी या अन्य विकल्प) का उपयोग कर भोजन पकाया जा सकता है। 
  •     निरंतर निगरानी: विभाग स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। यदि समस्या गंभीर होती है, तो उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर वैकल्पिक योजना पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, अभिभावकों और छात्रों को पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है।