झारखंड में भ्रष्टाचार पर कई जिलों की ढिलाई, रिमाइंडर पर जवाब तक नहीं; लोकायुक्त को 5 माह में 380 शिकायतें
झारखंड लोकायुक्त कार्यालय को भ्रष्टाचार की शिकायतों पर जिलों से अपेक्षित जवाब नहीं मिल रहा है, जिससे अब समन भेजने ...और पढ़ें

झारखंड में भ्रष्टाचार पर जिलों की धीमी रिपोर्टिंग, लोकायुक्त समन भेजने की तैयारी में।
HighLights
भ्रष्टाचार मामलों में जिलों से लोकायुक्त को रिपोर्ट नहीं मिल रही।
पांच माह में लोकायुक्त को 380 से अधिक शिकायतें मिलीं।
अंचलों में जमीन संबंधी भ्रष्टाचार की शिकायतें सबसे ज्यादा।
दिलीप कुमार, रांची। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सुनवाई करने वाली राज्य की सबसे बड़ी एजेंसी लोकायुक्त कार्यालय को जांच रिपोर्ट भेजने में जिले शिथिलता बरत रहे हैं। लोकायुक्त कार्यालय के रिमाइंडर पर रिमाइंडर के बावजूद जिलों से उस अनुरूप जवाब नहीं आ रहा है, जिसकी कार्यालय को उम्मीद है। आ रहीं शिकायतों पर लोकायुक्त कार्यालय से भेजे जा रहे पत्रों को जिले दबा रहे हैं।
निर्धारित अवधि में उस पत्र का जवाब नहीं मिलने पर लोकायुक्त कार्यालय से रिमाइंडर वन (स्मार-1) व रिमाइंडर टू (स्मार-2) भी भेजा जा चुका है। अब अधिकांश मामलों में समन भेजने की तैयारी है। लोकायुक्त नोटिस भेजकर संबंधित आरोपितों को सशरीर उपस्थित करवा सकते हैं।
लोकायुक्त सेवानिवृत्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने इसी वर्ष 21 अप्रैल को पदभार ग्रहण किया था। उनके पदभार ग्रहण करने के पहले लोकायुक्त कार्यालय में केवल 63 शिकायतें आईं थीं। उनके पदभार ग्रहण करने के बाद से अब तक 380 से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं।
आ रहीं शिकायतों के आधार पर लोकायुक्त कार्यालय संबंधित विभाग से पत्राचार कर उस शिकायतों से अवगत कराते हुए उसपर रिपोर्ट तलब करता आ रहा है। पहली बार डेढ़ से दो महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी जा रही है।
इस अवधि में जवाब नहीं मिलने पर रिमाइंडर वन भेजकर 15 दिन से एक महीने के भीतर जवाब मांगा जा रहा है। उसके बाद रिमाइंडर टू तक भेजा जा रहा है। संबंधित जिला, विभाग से जवाब भेजने में उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है, जिसपर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
अंचलों में भ्रष्टाचार की है सर्वाधिक शिकायतें
लोकायुक्त कार्यालय में आ रहीं शिकायतों में सर्वाधिक शिकायतें अंचलों में भ्रष्टाचार से संबंधित हैं। रुपये नहीं देने पर म्यूटेशन आवेदन रिजेक्ट कर देना, बिना रिश्वत कोई काम नहीं होना, जमीन पर दखल-कब्जा व घर बने रहने के बावजूद रिश्वत नहीं देने पर बिना भौतिक सत्यापन के यह लिख देना कि आवेदक का जमीन पर दखल कब्जा नहीं है और आवेदन को अस्वीकृत करा देना आम बात हो गया है।
लोकायुक्त के पदभार ग्रहण के बाद से आईं 380 से अधिक शिकायतों में 250 से अधिक शिकायतें जमीन संबंधित हैं, जिसमें अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार की शिकायतें अधिक हैं।
जवाब नहीं देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की तैया
लोकायुक्त के पत्र व दो-दो स्मार के बावजूद संबंधित अधिकारी जवाब नहीं देते हैं तो लोकायुक्त नोटिस भेजकर उन्हें सशरीर उपस्थित होने का आदेश दे सकते हैं। इसके बावजूद सशरीर उपस्थित नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई कर उस अधिकारी के पैतृक विभाग से कृत कार्रवाई रिपोर्ट मांग सकते हैँ।
