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झारखंड शराब घोटाला में ED रेस, छह अधिकारियों को समन; 38 करोड़ का घपला 150 करोड़ पार

Published: Tue, 10 Mar 2026 09:43 PM (IST)Updated: Wed, 11 Mar 2026 08:23 PM (IST)

ईडी ने शराब घोटाला मामले में अपनी जांच तेज कर दी है। एसीबी के केस के आधार पर ईडी ने ...और पढ़ें

ईडी ने शराब घोटाला जांच में तेजी लाई।

ईडी ने शराब घोटाला जांच में तेजी लाई।

HighLights

  1. फर्जी बैंक गारंटी से 150 करोड़ के राजस्व का नुकसान।

  2. उत्पाद विभाग के छह अधिकारी पूछताछ के लिए तलब।

राज्य ब्यूरो, रांची। शराब घोटाला केस में एसीबी की जांच धीमी पड़ते ही ईडी ने अपनी जांच तेज कर दी है। ईडी ने आधा दर्जन अधिकारियों व कर्मियों को पूछताछ के लिए बुलाया।

एसीबी के रांची थाने में 20 मई 2025 को दर्ज कांड संख्या 9/2025 के आधार पर ईडी ने अपने रांची स्थित जोनल कार्यालय में इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) 10/2025 दर्ज की थी, जिसकी जांच जारी है। ईडी ने इस केस में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के छह अधिकारियों-कर्मियों को समन कर 12 से 15 मार्च के बीच पूछताछ के लिए बुलाया है।

जिन्हें समन किया गया है, उनमें उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन महाप्रबंधक (वित्त) सुधीर कुमार, तत्कालीन महाप्रबंधक वित्त सुधीर कुमार दास, झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के तत्कालीन वरीय लेखापाल नवेंदु शेखर शामिल हैं।

साथ ही तत्कालीन उच्च वर्गीय लेखापाल अमित कुमार, तत्कालीन उच्च वर्गीय लिपिक मोहम्मद मोहसीन कमाल राजा और तत्कालीन सहायक लेखापाल शीतल कुमारी को भी बुलाया गया है।

ईडी का यह ईसीआइआर उत्पाद विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में पद का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक गारंटी देने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों को मैनपावर आपूर्ति का ठेका देने से संबंधित है।

जिन प्लेसमेंट एजेंसियों पर फर्जी बैंक गारंटी देने का आरोप लगा है, उनमें मेसर्स मार्शन इनोवेटिव व मेसर्स विजन शामिल हैं।

एसीबी झारखंड ने भी इस मामले में केस दर्ज करने के बाद एक-एक कर 17 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। किसी पर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिससे सभी को डिफाल्ट बेल मिलता चला गया।

एसीबी ने जांच में यह पाया था कि फर्जीवाड़े का यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं था, बल्कि अधिकारियों और निजी कंपनियों की मिलीभगत से संचालित एक संगठित तंत्र का हिस्सा था। छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट ने झारखंड में यहां के अधिकारियों के साथ मिल कर इस घोटाले को अंजाम दिया था।

एसीबी ने शुरुआत में इस फर्जीवाड़े से राज्य सरकार को करीब 38 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान की आशंका जताई थी। जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा 150 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया था।

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