शराब दुकान के रिन्यूअल की नई शर्तें: 7 फरवरी तक देनी होगी लाइसेंस फीस, अवैध शराब रोकने को टास्क फोर्स का गठन
झारखंड शराब व्यापारी संघ और उत्पाद विभाग की बैठक में शराब दुकानों के नवीनीकरण की नई शर्तें तय हुईं। 2026-27 ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड शराब व्यापारी संघ के सदस्यों, शराब कारोबारियों के साथ उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव अमिताभ कौशल ने गुरुवार को बैठक की।
इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों के नवीनीकरण को ले सात फरवरी तक लाइसेंस शुल्क जमा करना आवश्यक है।
निर्धारित तिथि तक शुल्क जमा करने पर ही विभाग नवीनीकरण को मान्य करेगा। नगर निगम क्षेत्र की दुकानों के लिए लाइसेंस शुल्क दो लाख रुपये व अन्य क्षेत्रों के लिए यह शुल्क एक लाख रुपये होता है।
इतना ही नहीं, बैंक गारंटी के फर्जीवाड़ा को देखते हुए यह सहमति बनी है कि अब बैंक गारंटी के बदले डिमांड ड्राफ्ट देना होगा।
अगले वित्तीय वर्ष के लिए दिया जाने वाला 12.5 प्रतिशत मार्जिन मनी व्यवसायियों के आग्रह के बाद अब फरवरी के बदले होली के बाद 10 मार्च तक जमा करने पर सहमति बनी है।
इसमें पांच प्रतिशत सिक्यूरिटी मनी व निर्धारित एमजीआर का 7.5 प्रतिशत एमजीआर शामिल है। झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के डिपो से शराब के उठाव में हो रही परेशानी की भी व्यवसायियों ने उत्पाद सचिव को जानकारी दी।
व्यवसायियों ने बताया कि जेएसबीसीएल के डिपो से शराब उठाव के दौरान लाइसेंसधारियों को चालान दिखाने व गाड़ी संख्या के नाम पर अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है।
इसपर उत्पाद सचिव ने आयुक्त उत्पाद को जांच का आदेश दिया और स्पष्ट किया कि जिन लाइसेंसधारियों ने वालेट में पहले से शराब उठाव के लिए राशि जमा कर रखी है, उन्हें बार-बार चालान दिखाने की आवश्यकता नहीं है।
बैठक में व्यवसायियों की ओर से मुख्य रूप से संघ के अध्यक्ष अचिंत्य शा, महासचिव सुबोध जायसवाल, उमाशंकर सिंह, अजय साहू, संजीव चौधरी, वीरेंद्र साहू, मुकेश साहू, जयराम, पंकज प्रसून, संजय जायसवाल, संजीव गुप्ता, साथ में पांच जिलों से व्यापारी प्रतिनिधि शामिल हुए।
तो जेएसबीसीएल स्वयं करेगा संचालन
आगामी वित्तीय वर्ष लिए जो दुकानें सरेंडर होंगी, उनके लिए फिर से लाटरी निकाला जाएगा। अगर लाटरी से भी दुकानें आवंटित नहीं हुईं तो वैसी दुकानों का संचालन जेएसबीसीएल स्वयं करेगा। बैठक में इसपर सहमति बनी है।
इसके अलावा व्यवसायी संघ ने अवैध शराब का मुद्दा भी उठाया और बताया कि पकड़ी गई शराब के लिए मालखाना नहीं है। इसके चलते पकड़ी गई शराब पुन: बाजार में बिक जाती है।
इसपर उत्पाद सचिव ने उत्पाद आयुक्त को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की गहन जांच कराकर न्यायालय के माध्यम से शराब का विधिवत नष्ट कराएं।
राज्य में अवैध शराब पर रोक के लिए टास्क फोर्स गठित करने की तैयारी की भी बात कही गई है।
