रांची, राज्य ब्यूरो। Old Pension Scheme पुरानी पेंशन योजना को झारखंड में लागू करने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार फिलहाल अडिग है और इस मामले में जो निर्देश मुख्य सचिव की ओर से प्राप्त हुए हैं उसको भी प्रस्ताव में शामिल किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि अभी मुख्य सचिव के यहां से प्रस्ताव से संबंधित संचिका लौटी नहीं है लेकिन इस मामले में यह तय माना जा रहा है कि सरकार पीछे नहीं हटेगी। केंद्र सरकार के पास जमा 17 हजार करोड़ रुपये की वापसी को लेकर भी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर कोर्ट भी जा सकती है। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओल्ड पेंशन स्कीम) अगस्‍त तक देने की घोषणा की है। तमाम अड़चनों के बावजूद एक बात तय लग रहा है कि यह योजना झारखंड में लागू होगी।

राज्य सरकार छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किए गए प्रविधान को भी समझने की कोशिश कर रही है। इससे संबंधित संचिका पर राज्य के मुख्य सचिव ने अपनी टिप्पणी में लिखा है कि पूर्व में केंद्र सरकार के पास जमा 17000 करोड़ रुपए कैसे वापस मिलेंगे, इसको लेकर स्पष्ट नीति का निर्धारण पहले कर लेना होगा। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार यह राशि नहीं लौट आती है तो राज्य सरकार कोर्ट भी जा सकती है। बहरहाल, एक बात तो तय है की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की घोषणा के अनुरूप शीघ्र ही इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया जाएगा। कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा लेकिन कब से मिलेगा यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

राज्य सरकार का निर्देश, कमांड एरिया में बिजली दे डीवीसी

दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के कमांड एरिया के सात जिलों कोडरमा, चतरा, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, गिरिडीह और धनबाद में बिजली संकट गहराने को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। इन जिलों में महज आठ से दस घंटे ही बिजली की आपूर्ति हो रही है। राज्य ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी अविनाश कुमार ने डीवीसी को आगाह किया है कि बिजली आपूर्ति सामान्य करें। उन्होंने इस संदर्भ में डीवीसी के चेयरमैन से भी बातचीत की है और उन्हें पत्र भेजा है।

इधर डीवीसी ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि उसका बकाया पैसे का भुगतान किया जाए। इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र भेजा गया है। डीवीसी ने मार्च, 2022 तक बकाया भुगतान के मद में 3961 करोड़ का दावा ठोका है। डीवीसी के अधिकारियों के मुताबिक कोयले के लिए नकद पैसे का भुगतान करना पड़ता है। राज्य सरकार बकाया पैसा जल्द दे। कमांड एरिया में बिजली की कमी के संबंध में डीवीसी के अधिकारियों ने कारण बताया है कि कोडरमा थर्मल पावर प्लांट की एक यूनिट बंद हो गई है।

राज्य ऊर्जा विकास निगम की ओर से भेजे गए पत्र में उल्लेख है कि यदि कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन किसी कारण से बंद हो जाता है तो डीवीसी अपने स्रोत से बिजली लेकर राज्य को आपूर्ति के लिए बाध्य है। डीवीसी इस मामले को देखे और बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था कर उपलब्ध कराए ताकि उपभोक्ताओं को नियमित रूप से बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराया जा सके। जानकारी के मुताबिक डीवीसी कमांड एरिया में 650 की जगह 400 मेगावाट तक बिजली आपूर्ति होने के कारण संकट की स्थिति बनी हुई है। डीवीसी के कोडरमा और बंगाल स्थित रघुनाथपुर और मिजिया थर्मल पावर प्लांट से उत्पादन प्रभावित हुआ है।

डीवीसी के जनसंपर्क अधिकारी अभय भयंकर के मुताबिक कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन से गुरुवार तक उत्पादन सामान्य हो जाएगा। ऊर्जा विभाग का पत्र प्राप्त हुआ है। डीवीसी धीरे-धीरे बिजली आपूर्ति में सुधार कर रहा है। सामान्य रूप से 500 मेगावाट की आपूर्ति की जाती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली दी जा रही है। आपूर्ति में कमी प्लांटों में खराबी के कारण आई है। इसे ठीक करने का प्रयास चल रहा है।

Edited By: Alok Shahi