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कमर्शियल कोल माइनिंग में पिछड़ा झारखंड: देश के 37% आवंटित ब्लॉक राज्य में, पर उत्पादन में हिस्सेदारी केवल 1.3%

By Amit SinghEdited By: Nishant Bharti
Published: Wed, 29 Jul 2026 10:20 AM (IST)

देश में व्यावसायिक कोयला खनन के छह साल बाद भी झारखंड को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है, जबकि राज्य को ...और पढ़ें

कमर्शियल कोल माइनिंग में पिछड़ा झारखंड

कमर्शियल कोल माइनिंग में पिछड़ा झारखंड

HighLights

  1. झारखंड को देश के सर्वाधिक 37 व्यावसायिक कोयला ब्लॉक मिले।

  2. राज्य का उत्पादन राष्ट्रीय कुल का मात्र 1.3% रहा।

  3. भूमि अधिग्रहण, मंजूरी के कारण परियोजनाएं अटकी हैं।

जागरण संवाददाता, रांची। देश में व्यावसायिक कोयला खनन (कमर्शियल कोल माइनिंग) शुरू होने के छह साल बाद भी झारखंड को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। राज्य को सबसे अधिक 37 व्यावसायिक कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए हैं, लेकिन वर्ष 2025-26 में इनसे केवल 0.35 मिलियन टन (3.5 लाख टन) कोयले का ही उत्पादन हो सका। यह देश के कुल व्यावसायिक कोयला उत्पादन का महज 1.3 प्रतिशत है।

लोकसभा में कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे द्वारा दिए गए लिखित जवाब से यह जानकारी सामने आई है। यह जवाब चतरा सांसद कालीचरण सिंह के सवाल पर दिया गया।

132 व्यावसायिक कोयला ब्लाकों का आवंटन 

सरकार के अनुसार, देशभर में अब तक 132 व्यावसायिक कोयला ब्लाकों का आवंटन किया जा चुका है। इनमें से 23 ब्लाकों को खनन शुरू करने की अनुमति (माइन ओपनिंग परमिशन) मिल चुकी है, जबकि 15 ब्लॉकों में उत्पादन शुरू हो गया है। 

वहीं 117 ब्लॉक अभी भी भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण एवं अन्य वैधानिक मंजूरी तथा बुनियादी ढांचे के विकास जैसी प्रक्रियाओं से गुजर रहे हैं।

व्यावसायिक कोयला उत्पादन तेजी से बढ़ा

आंकड़ों के अनुसार, देश में व्यावसायिक कोयला उत्पादन तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में 1.15 मिलियन टन उत्पादन हुआ था, जो बढ़कर 2025-26 में 26.12 मिलियन टन पहुंच गया। इसके विपरीत झारखंड में उत्पादन बेहद धीमी गति से बढ़ा है।

कोयला मंत्रालय का कहना है कि व्यावसायिक खनन का उद्देश्य घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि झारखंड में अधिकांश परियोजनाएं अभी शुरुआती चरण में होने के कारण उत्पादन नहीं बढ़ पा रहा है।

चतरा लोकसभा क्षेत्र में सबसे अधिक सुस्ती

सबसे अधिक सुस्ती चतरा लोकसभा क्षेत्र के कोयला ब्लाकों में देखने को मिल रही है। चतरा, हजारीबाग और लातेहार जिलों में फैले आठ व्यावसायिक कोयला ब्लॉकों में से एक भी अब तक उत्पादन शुरू नहीं कर पाया है। 

इनमें चकला, ब्रिंदा, सरेगढ़ा, साई, नॉर्थ धाडू और चितरपुर (संशोधित) सहित अन्य ब्लॉक शामिल हैं। ये सभी अभी भूमि अधिग्रहण, मंजूरी और आधारभूत संरचना विकसित होने का इंतजार कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मंजूरी की प्रक्रिया तेज की जाए और बुनियादी ढांचा समय पर तैयार हो, तो झारखंड देश के व्यावसायिक कोयला उत्पादन में बड़ी भूमिका निभा सकता है। फिलहाल सबसे अधिक कोयला ब्लाक मिलने के बावजूद राज्य का उत्पादन अपेक्षा से काफी पीछे है।