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5 तारीख को कटनी है 20 हजार की EMI, लेकिन खाते में वेतन नहीं; नियुक्ति रद होने के बाद चयनित अभ्यर्थी बोले- अब क्या करें?

Published: Fri, 21 Aug 2026 11:43 AM (IST)

झारखंड में नियुक्ति रद होने से सैकड़ों चयनित अभ्यर्थी गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वे घर, बाइक ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. चयन रद्द होने से अभ्यर्थियों को आर्थिक संकट।

  2. परिवार का खर्च चलाना भी हुआ मुश्किल।

जागरण संवाददाता, रांची। घर के काम के लिए पांच महीने पहले सात लाख रुपये का लोन लिया था। हर महीने 20 हजार रुपये की किस्त जाती है। पांच तारीख को खाते से ईएमआई कटती है, लेकिन अब समझ नहीं आ रहा कि इस महीने की किस्त कहां से भरी जाएगी। यह परेशानी है प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के पद पर चयनित दीनबंधु दूबे की।

नौकरी मिलने के बाद दीनबंधु ने भविष्य को लेकर कुछ योजनाएं बनाई थीं। नियमित वेतन के भरोसे लिया गया लोन अब बोझ बन गया है। नियुक्ति रद होने के बाद सबसे बड़ी चिंता यही है कि आने वाली किस्त कैसे चुकाई जाएगी। दीनबंधु की परेशानी अकेले उनकी नहीं है। नियुक्ति रद होने से प्रभावित सैकड़ों चयनित अभ्यर्थियों के सामने नौकरी के साथ-साथ अपने आर्थिक फैसलों को लेकर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

किस्त पर ली बाइक, फ्रिज और एसी; अब डिफाल्टर होने का डर

गिरिडीह के रितेश कुमार चौधरी ने एएसओ के पद पर चयन होने के बाद किस्त पर फ्रिज, एसी और बाइक ली थी। उस समय उन्हें भरोसा था कि नौकरी मिलने के बाद हर महीने की किस्त आसानी से चुकती रहेगी। उन्हें क्या पता था कि कुछ ही समय बाद नौकरी ही हाथ से चली जाएगी।

अब रितेश के सामने सितंबर के पहले सप्ताह में आने वाली ईएमआई चुकाने की चिंता है। उनका कहना है कि अगर समय पर किस्त नहीं जमा हुई तो डिफाल्टर होने का डर है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि नौकरी रद होने के बाद वेतन मिलेगा या नहीं और अगर मिलेगा तो कब तक।

नौकरी सिर्फ रोजगार नहीं, पूरे परिवार का सहारा थी

पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर की रहने वाली नीलम जमुदा के लिए भी नौकरी केवल एक नियुक्ति नहीं थी, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभालने का जरिया थी। परिवार में वह बड़ी बेटी हैं। पिता सेवानिवृत्त हैं, जबकि मां, दो भाई और एक दिव्यांग बुआ की जिम्मेदारी भी परिवार पर है।

नीलम के अनुसार, वह अपने भाइयों की पढ़ाई समेत परिवार की कई जिम्मेदारियां संभाल रही थीं। नौकरी मिलने के बाद परिवार को लगा था कि अब आर्थिक मुश्किलें कुछ कम होंगी। वह रांची के एफओपी बिल्डिंग स्थित ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत थीं।

लेकिन नियुक्ति रद होने के बाद सिर्फ नीलम की नौकरी नहीं गई, बल्कि उस परिवार का आर्थिक सहारा भी अचानक छिन गया, जो इसी नौकरी से अपनी आगे की जिंदगी की उम्मीद लगाए बैठा था।

एक तरफ बैंक की किस्त, दूसरी तरफ घर का खर्च और परिवार की जिम्मेदारियां- नियुक्ति रद होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की मुश्किल अब सिर्फ नौकरी वापस पाने तक सीमित नहीं रह गई है। उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाने का सवाल भी खड़ा हो गया है।