खनिज सेस पर केंद्र-झारखंड में आर-पार: 'झारखंड आंदोलन' की तर्ज पर होगी आर्थिक नाकेबंदी, JMM ने दी बड़ी चेतावनी
झामुमो खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का विरोध कर रहा है, जो राज्यों को खनिजों पर ...और पढ़ें

खनिज सेस पर झामुमो का बड़ा आंदोलन: झारखंड सरकार केंद्र से टकराव को तैयार।
HighLights
झामुमो खनिज सेस पर केंद्र के नए कानून का विरोध कर रहा है।
झारखंड आंदोलन की तरह आर्थिक नाकेबंदी की रणनीति पर विचार।
संशोधित कानून से राज्य को खनिज राजस्व में भारी नुकसान होगा।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड आंदोलन के जमाने में सरकार वार्ता की मेज पर नहीं आती थी तो खनिजों की आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की जाती थी। यह आंदोलन का ऐसा चरण होता था, जिससे पटना और दिल्ली की सरकारें हलचल में आ जाती थीं।
जेपीएससी घोटाले में आलोचना झेल रहे झामुमो ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2026 के विरोध में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन कर इसे राज्यव्यापी मुद्दा बनाने की रणनीति बनाई है। प्रखंड स्तर पर धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम संपन्न होने के बाद पार्टी जिला व राज्य स्तर पर भी आंदोलन करेगी।
अगस्त माह में संसद के मानसून सत्र के दौरान खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने के बाद झारखंड में सत्तारूढ़ झामुमो के साथ यूपीए गठबंधन में शामिल दलों ने विरोध दर्ज कराया है।
झामुमो कहीं अधिक मुखर है। सत्ता की बागडोर झामुमो अध्यक्ष हेमंत सोरेन के पास है। हेमंत सरकार द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में खनिजों पर लगाए गए सेस से छह हजार करोड़ से अधिक राजस्व की वसूली की गई।
चालू वित्तीय वर्ष में 13 हजार करोड़ राजस्व उगाही का सरकार का अनुमान रहा है। कानून में बदलाव के बाद हेमंत सरकार खनिज पर सेस नहीं ले सकती। यद्यपि, हेमंत सरकार ने सेस की उगाही बंद नहीं की है। जाहिर है, संवैधानिक प्रविधान पर निकट भविष्य में केंद्र और राज्य में टकराव तय है। झामुमो नेतृत्व जानता है कि लड़ाई लंबी है।
यही कारण है कि झामुमो ने इस मसले पर सड़क पर उतरने की रणनीति पर कदमताल शुरू कर दिया है। पार्टी ने आंदोलन के अगले चरणों में आर्थिक नाकेबंदी की भी चेतावनी दी है।
झारखंड और कर्नाटक को छोड़ जहां खनिज भंडार वहां भाजपा की सरकार
खनिज पर सेस की उगाही के मसले पर झारखंड की यूपीए सरकार को सिर्फ कर्नाटक सरकार को समर्थन मिल सकता है, और किसी का शायद नहीं। भारत में राजस्थान, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश को खनिज बहुल राज्य माना जाता है।
पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी कोयला समेत कुछ खनिज मिलते हैं। मगर खनिज का भंडार इतना ज्यादा नहीं है जो सूबे की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सके। राजस्थान में शीशा, जस्ता, चूना पत्थर, जिप्सम के साथ कच्चे तेल का भंडार है।
ओडिशा में कोयला, लौह अयस्क, बाक्साइट, मैगनीज, तांबा और क्रोमाइट की उपलब्धता है छत्तीसगढ़ में कोयला, लौह अयस्क, बाक्साइट, चूना पत्थर है। मध्य प्रदेश में तांबा, मैगनीज, पन्ना के साथ क्षेत्र विशेष में कोयला भी मिलता है। महाराष्ट्र के भी एक हिस्से में कोयला मिलता है।
इन राज्यों में भाजपानीत एनडीए गठबंधन की सरकार है। झारखंड में कोयला, लौह अयस्क, तांबा, अभ्रक, स्वर्ण अयस्क, पन्ना, चूना पत्थर, बाक्साइट, डोलोमाइट, ग्रेफाइट समेत कई खनिज हैं।
कर्नाटक में भी स्वर्ण अयस्क, लौह अयस्क, मैगनीज और चूना पत्थर की खानें हैं। दोनों राज्यों में यूपीए की सरकार है। इसके अलावा झारखंड, आंध्र प्रदेश, मेघालय, राजस्थान, कर्नाटक एवं तेलंगाना में यूरेनियम मिलता है।यूरेनियम के राजस्व की वसूली का आधार दूसरे खनिजों की तुलना में भिन्न है।
खान एवं खनिज अधिनियम में संशोधन उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवमानना के लिए बनाया गया कानून है। शीर्ष न्यायालय की पूर्ण खंडपीठ ने खनिज पर राजस्व उगाही के लिए राज्यों के अधिकार पर मुहर लगाई है। इसमें सुधार के लिए केंद्र ने प्रभावित राज्य सरकारों से संवाद करने की जरूरत नहीं समझी है। सिर्फ संख्या के बल पर केंद्र सरकार ने कानून बना कर शीर्ष न्यायालय के आदेश को निष्प्रभावी करने का प्रयास किया है। ऐसा तो अंग्रेज राज में भी नहीं होता था। झामुमो लंबी लड़ाई को तैयार है।
-विनोद पांडेय, केंद्रीय प्रवक्ता, झामुमो
