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लातेहार में जीराफूल चावल से संवरेगी महिलाओं की किस्मत, देश के प्रीमियम बाजारों तक पहुंचेंगे प्रोडक्ट

Published: Wed, 23 Sep 2026 08:32 AM (IST)

झारखंड में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए लातेहार के जीराफूल चावल की पैकेजिंग और मार्केटिंग शुरू की गई है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. लातेहार में जीराफूल चावल की पैकेजिंग, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण।

  2. नेतरहाट एफपीसी को 25 टन जीराफूल चावल का बड़ा ऑर्डर।

  3. 1500 किसान जुड़े, स्थानीय उत्पाद को प्रीमियम बाजार से जोड़ा।

आशीष झा, रांची। झारखंड में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वावलंबन के प्रयासों के तहत अब बेहतरीन खाद्य पदार्थों के उत्पादन, इनकी पैकेजिंग और मार्केटिंग के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

इस कड़ी में पलामू प्रमंडल के लातेहार जिले में प्रसिद्ध जीराफूल चावल की पैकेजिंग का काम शुरू कर दिया गया है। लातेहार की महिलाओं को एफएमसीजी श्रेणी में पहले से एक किलो और दो किलो के पैकेट तैयार करने का एक बड़ा ऑर्डर मिल चुका है। इस पर काम भी चल रहा है।

नई व्यवस्था में प्रदेश के लातेहार जिले का पारंपरिक और सुगंधित जीराफूल चावल अब देश के प्रीमियम बाजारों तक अपनी पहुंच बनाने की ओर बढ़ गया है। महुआडांड़ क्षेत्र में उत्पादित इस चावल को संगठित बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है।

'किसान-से' एजीटेक प्राइवेट लिमिटेड ने नेतरहाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को 25 टन जीराफूल चावल खरीदने का आदेश दिया है, जिसका कुल मूल्य 26.25 लाख रुपये है।

यह खरीद आदेश अप्रैल 2026 में ही जारी हुआ था, जिसमें 1 किलोग्राम और 2 किलोग्राम के कुल 16,250 पैकेट तैयार होंगे। इसी क्रम में 31 अगस्त 2026 को एक बार फिर लगभग 6.70 टन जीराफूल चावल लातेहार से गुरुग्राम स्थित 'किसान-से' के वेयरहाउस के लिए रवाना किया गया। यह लातेहार के स्थानीय उत्पाद को बड़े और प्रीमियम बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक उपलब्धि है।

पोषण और गुणवत्ता में भी बेहतर

जीराफूल चावल अपनी विशिष्ट खुशबू, महीन दाने, मुलायम बनावट और अलग स्वाद के लिए जाना जाता है। उपलब्ध परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इसमें प्रति 100 ग्राम 8.96 ग्राम प्रोटीन पाया गया है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 57 दर्ज किया गया है।

इसके अलावा कुल वसा, संतृप्त वसा और सोडियम की मात्रा भी कम पाई गई है। ये विशेषताएं इसे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए एक अलग पहचान वाला उत्पाद बनाने में मदद करती हैं।

लातेहार जिला प्रशासन द्वारा महुआडांड़ में स्थापित राइस कम पीनट प्रोसेसिंग यूनिट इस मूल्य शृंखला को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। इस इकाई का संचालन नेतरहाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिससे लगभग 1,500 किसान जुड़े हैं।

जेएसएलपीएस द्वारा एफपीओ को सहयोग और मार्गदर्शन दिया गया है, जिससे किसानों के उत्पाद को प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने में मदद मिली है।

सेतु सेल ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

जेएसएलपीएस के सेतु सेल ने किसान, एफपीओ, प्रसंस्करण, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार के बीच जरूरी कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस पहल से स्थानीय उत्पाद को केवल कच्चे कृषि उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि राज्य में मूल्यवर्धित और बाजार-उन्मुख उत्पाद के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

जीराफूल चावल की यह पहल झारखंड के अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह दर्शाता है कि कैसे स्थानीय उत्पादन को बेहतर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क के माध्यम से किसानों के लिए अधिक मूल्य और टिकाऊ आजीविका के अवसरों में बदला जा सकता है। -दीपिका पांडेय सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री।