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झारखंड की जेलों में सिर्फ सर्वे पर सर्वे: अपराधी जेल से ही सक्रिय, 10 साल से अटकीं कैदी कल्याण योजनाएं

Published: Sun, 11 Oct 2026 07:30 AM (GMT+05:30)

झारखंड की जेलों में पिछले दस सालों से जैमर अपग्रेडेशन और कैदियों के कल्याण की कई योजनाएं सिर्फ सर्वे तक ...और पढ़ें

जेलों में 2जी जैमर को 5जी तक अपग्रेड करने के लिए आधा दर्जन से अधिक बार सर्वे कर चुकी हैं कई कंपनियां।

जेलों में 2जी जैमर को 5जी तक अपग्रेड करने के लिए आधा दर्जन से अधिक बार सर्वे कर चुकी हैं कई कंपनियां।

HighLights

  1. झारखंड जेलों में 2जी जैमर 5जी में अपग्रेड नहीं हुए।

  2. कैदियों के कल्याण व पुनर्वास की योजनाएं अधूरी रहीं।

  3. जेल परिसर में पेट्रोल पंप खोलने का प्रस्ताव भी अटका।

राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य की जेलों में सिर्फ सर्वे पर सर्वे हुए, लेकिन धरातल पर कई योजनाएं उतर नहीं सकीं। न तो जैमर को अपग्रेड किया जा सका, न हीं कैदियों के कल्याण, उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने व उन्हें आत्मनिर्भर बनाने को लेकर प्रस्तावित योजनाओं को अमली जामा पहनाया जा सका।

यह प्रक्रिया पिछले दस साल से चल रही है। हाई कोर्ट से इसको लेकर कई बार आदेश भी जारी हो चुका है। स्थिति यथावत है। पहला मामला जैमर का है। राज्य की अधिसंख्य जेलों में 2जी जैमर लगे हुए हैं। ये जैमर केवल 2जी कनेक्टिविटी वाले मोबाइल फोन के इनकमिंग व आउटगोइंग काल को रोक सकते हैं। आज राज्य में 5जी मोबाइल चल रहा है।

जेलों से अपराधी 5जी मोबाइल से अपने गैंग के संपर्क में हैं। विशेष शाखा की रिपोर्ट, मोबाइल लोकेशन, गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ में इसका खुलासा होता रहा है। जिला पुलिस प्रशासन की छापेमारी में भले ही उपलब्धि हाथ नहीं लगती है, लेकिन जेलों से मोबाइल संचालन की जानकारी मिलती रही है।

जब न्यायालय तक यह मामला पहुंचा तो न्यायालय से भी कई बार राज्य सरकार को जैमर अपग्रेडेशन को लेकर निर्देश जारी होता रहा है। झारखंड सरकार ने भी इसके लिए पहल की और विभिन्न जैमर कंपनियों को जेलों में जैमर अपग्रेडेशन के लिए आमंत्रित किया।

इन कंपनियों ने आधा दर्जन से अधिक बार जेलों में सर्वे किया, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। यह प्रक्रिया दस साल से चल रही है। मामला अब तक जस की तस है। वर्तमान में ओपन जेल व ओपन बैरक का मामला प्रक्रियाधीन है, जिसपर काम चल रहा है।

जेल परिसर में खुलना था पेट्रोल पंप

वैसे, जेल परिसर जो मुख्य मार्ग के समीप हैं, वहां पेट्रोल पंप खुलना था। उन पेट्रोल पंपों का संचालन सजायाफ्ता कैदियों के माध्यम से कराया जाना था। वैसे कैदी जो आजीवन सश्रम कारावास के कैदी हैं, लेकिन उनका जेल में रहने के दौरान व्यवहार कुशल है और घटना का पछतावा है, उन कैदियों के लिए यह व्यवस्था होनी थी।

उन्हें रोजगार मिलता, पेट्रोल पंप संचालित होता। ऐसे कैदी समाज की मुख्य धारा से जुड़ते। पेट्रोल पंप के लिए इंडियन आयल व भारत पेट्रोलियम ने राज्य की जेलों का सर्वे भी किया, लेकिन यह योजना भी आगे नहीं बढ़ सकी।