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झारखंड के अस्पतालों का बदलेगा नक्शा, मरीजों को तुरंत इलाज के लिए एक ही फ्लोर पर मिलेंगे ICU, OT और इमरजेंसी

Published: Sat, 18 Apr 2026 05:25 AM (IST)

झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की कार्यप्रणाली सुधारने का निर्णय लिया है। मरीजों को त्वरित और सहज इलाज मिले, इसके लिए उनके डिजाइन में बदलाव होगा।

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राज्य ब्यूरो, रांची। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार करने तथा मरीजों को सहज और त्वरित इलाज की सुविधाएं प्रदान करने के लिए उसके डिजाइन में बदलाव करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने निर्माणाधीन तथा वर्तमान में संचालित मेडिकल कालेज एवं अस्पतालों की संरचना और योजना में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

दरअसल, विभागीय पदाधिकारियों द्वारा किए गए हालिया निरीक्षण में यह सामने आया था कि कई मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में आईसीयू, सीसीयू, एचडीयू, ऑपरेशन थिएटर, आइपीडी, रेडियोलॉजी सेंटर और डायग्नोस्टिक सेंटरों की स्थिति वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नहीं है। इससे मरीजों की आवाजाही और इलाज की प्रक्रिया प्रभावित होती है। 

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब अस्पतालों के डिजाइन की समीक्षा कर उन्हें पुनर्गठित करने का निर्णय लिया है। इसे लेकर गठित विशेषज्ञ समिति में सम्मिलित सभी विशेषज्ञ चिकित्सक रिम्स, रांची के छह विभागों के हैं। साथ ही इसमें सदर अस्पताल के प्रतिनिधि और झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के अधिकारी भी सम्मिलित हैं।

गठित विशेषज्ञ समिति में रिम्स के छह चिकित्सक सम्मिलित

डॉ प्रदीप कुमार भट्टाचार्य (क्रिटिकल केयर), डॉ हेमंत नारायण (कार्डियोलॉजी), डॉ. अजीत कुमार डुंगडुंग (मेडिसिन), डॉ. अनिल कुमार कमल (सर्जरी), डॉ. अंशु जनैयार (पैथोलॉजी) तथा डॉ. अनीश कुमार चौधरी (रेडियोलॉजी)।

यह है स्वास्थ्य विभाग की सोच

मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों का निर्माण “पेशेंट फ्लो” और ‘वर्क फ्लो’ के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित होगा। इसके तहत आईसीयू, ओटी, इमरजेंसी, रेडियोलॉजी सेंटर आदि को एक ही फ्लोर पर स्थापित किया जाएगा। ट्रामा सेंटर को ग्राउंड फ्लोर पर मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थापित किया जाएगा ताकि एंबुलेंस को त्वरित पहुंच मिल सके। 

आईसीयू, ओटी और इमरजेंसी सेवाओं को एक ही फ्लोर या नजदीकी क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जिससे उपचार में समय की बचत हो। संक्रमण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह स्टेराइल जोन के रूप में विकसित किया जाएगा और साफ व गंदे क्षेत्रों का स्पष्ट विभाजन किया जाएगा। साथ ही मरीजों, अस्पताल कर्मियों और बायो-मेडिकल वेस्ट के आवागमन के लिए अलग-अलग लिफ्ट और कारिडोर की व्यवस्था अनिवार्य होगी।

रेडियोलाजी, लैब और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं को ऐसी जगह स्थापित किया जाएगा, जहां से ओपीडी और इमरजेंसी दोनों के मरीज आसानी से पहुंच सकें।

विशेषज्ञ समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा डिजाइन

नई व्यवस्था के तहत निर्माण एजेंसियों को अपने डिजाइन विशेषज्ञ समिति के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। समिति द्वारा समीक्षा और आवश्यक सुझाव दिए जाने के बाद ही भवनों के अंतिम नक्शे को मंजूरी दी जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह के द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।