रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand News झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में गवाहों की सुरक्षा को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज मामले में सुनवाई हुई। इस मामले में जब अदालत ने गृह सचिव को कोर्ट में तलब किया तो आनन-फानन में सरकार ने मंगलवार को गवाह सुरक्षा योजना का गजट प्रकाशन किया गया। बुधवार को गृह सचिव अदालत में उपस्थित हुए और बताया कि राज्य में गवाह सुरक्षा योजना लागू कर दी गई।

अदालत ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई कि जब वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने गवाहों की सुरक्षा को लेकर योजना बना दी थी तो गजट प्रकाशन में इतनी देरी क्यों की गई। अदालत ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद भी निचली अदालतों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। राज्य की सभी अदालतों की सुरक्षा आडिट की जानी चाहिए ताकि सुरक्षा को चौक-चौबंद किया जा सके। अदालत ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अदालत में गोलीबारी की घटना दोबारा नहीं हो। इस मामले में अब 29 जुलाई को सुनवाई होगी।

इस दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य में गवाह सुरक्षा योजना लागू कर दी गई है। इसका गजट प्रकाशन हो गया है। इसके लिए एक फार्मेट दिया गया है, जिसे भरकर गवाह देंगे तो उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए सभी जिलों में फंड भी दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि इसे प्रभावी ढंग से राज्य में लागू किया जाए। बता दें कि कोर्ट से गवाही देने घर लौटे मनप्रीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अपराधियों ने मनप्रीत को उसके घर में घुसकर गोली मार दी। इस मामले में अदालत स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही है।

गवाह सुरक्षा योजना

इसके तहत किसी भी मामले में गवाह की सुरक्षा का दायित्व राज्य सरकार है। कोर्ट में गवाह को सुरक्षित पेश करने और बिना किसी भय के कोर्ट में गवाही दिलाने की भी जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। इसको लेकर एक निर्धारित प्रक्रिया बनाई गई है। जिसके तहत संवेदनशील मामले व कुख्यात अपराधी के खिलाफ गवाह को सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसके अलावा निर्धारित फार्मेट में आवेदन देने पर पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान करती है।

Edited By: Alok Shahi