यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jharkhand News: सहायक अभियंता नियुक्ति मामले में बुधवार को फैसला सुनाएगा झारखंड हाईकोर्ट... जानिए, पूरा मामला विस्तार से
Assistant Engineer Appointment सहायक अभियंता नियुक्ति के दौरान इंटरव्यू में ढाई गुना अभ्यर्थियों को नहीं बुलाने के मामले में झारखंड ...और पढ़ें

रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Assistant Engineer Appointment सहायक अभियंता नियुक्ति मामले में साक्षात्कार में ढाई गुना से कम अभ्यर्थियों को बुलाए जाने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगी। 16 जून को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह मामला जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में मामला सूचीबद्ध है। सहायक अभियंता नियुक्ति को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
प्रार्थी के वकील ने कोर्ट में दिया यह तर्क
इस संबंध में रवि शंकर सिंह और हंसराज उरांव की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से शुभाशीष रसिक सोरेन और अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि सहायक अभियंता नियुक्ति के लिए जेपीएससी ने विज्ञापन जारी किया था। प्रार्थियों ने भी आवेदन दिया था। चयनित भी हुए थे, लेकिन उन्हें साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया है। नियुक्ति नियमावली 2012 के अनुसार न्यूनतम ढाई गुना चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया जाना अनिवार्य है। लेकिन जेपीएससी ने 1.8 गुणा अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया है। ऐसा करना नियमावली और विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन है।
जेपीएससी के अधिवक्ता ने दिया यह तर्क
जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार सिंह ने कहा कि विज्ञापन के अनुसार प्रश्न पत्र दो खंड में था। एक खंड का प्रश्न वैकल्पिक था। जबकि दूसरे खंड में लिखित परीक्षा हुई थी। नियमानुसार खंड एक में पास होने वाले अभ्यर्थियों का ही खंड दूसरे की उत्तर पुस्तिका जांच की जाएगी। जेपीएससी ने दोनों खंडों में न्यूनतम अंक पाने वालों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है। इसमें 1.8 गुणा ही उत्तीर्ण हुए हैं। ऐसा करना जेपीएससी का अधिकार है। जेपीएससी ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए ही 1.8 गुणा अभ्यर्थियों को बुलाया गया है।
शर्त था कि नियमावली 2012 का पालन होगा
इस पर प्रार्थियों को कहना था कि विज्ञापन में यह शर्त लगाई गई थी कि नियुक्ति नियमावली 2012 का पालन किया जाएगा। जिसमें स्पष्ट लिखा गया है कि 2.5 गुणा अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया जाएगा। जेपीएससी को अपने अधिकार का प्रयोग दोनों खंड के प्रश्न पत्रों को परिणाम एक साथ निकलने में करना चाहिए था। इसके बाद निर्धारित न्यूनतम अंक के आधार पर 2.5 गुणा अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए। सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
आरक्षण के मामले पर चार जुलाई को सुनवाई
उधर, झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सहायक अभियंता नियुक्ति की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से बहस जारी रही। समयाभाव के चलते अदालत ने इस मामले में चार जुलाई की तिथि निर्धारित की है। अब इस मामले में चार जुलाई को सरकार की ओर से बहस की जाएगी। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन की ओर से अदालत को बताया गया कि सहायक अभियंता नियुक्ति की पीटी परीक्षा में जेपीएससी की ओर से कोई आरक्षण नहीं दिया गया है। अनारक्षित श्रेणी में सभी श्रेणियों के अभ्यर्थी आ सकते हैं, जिन्होंने निर्धारित कट आफ अंक से ज्यादा नंबर प्राप्त किया है। इसे आरक्षण देना नहीं कहा जा सकता है।
मामले में प्रार्थी की ओर से बहस पूरी
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से बहस पूरी कर ली गई है। कहा गया कि सहायक अभियंता नियुक्ति मामले में 256 अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है, जो आरक्षित श्रेणी से आते हैं। जेपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा में कोटिवार परिणाम जारी किया है। ईडब्ल्यूएस में महिला अभ्यर्थियों का अलग से परिणाम जारी किया गया है। ऐसा करना नियुक्ति नियमावली और विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन है। राज्य सरकार के पास प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने का कोई प्रविधान नहीं है। इसलिए पीटी परीक्षा परिणाम को रद कर देना चाहिए। इसके अलावा जेपीएससी ने पहले माना था कि पीटी में आरक्षण दिया गया है। अब वह इस बात से इन्कार कर रही है। कोर्ट में लिए गए स्टैंड को जेपीएससी बदल नहीं सकती है। बता दें इस संबंध में भास्कर ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि सहायक अभियंता की नियुक्ति में कोटिवार परिणाम जारी किया गया है। आरक्षित श्रेणी के कुछ अभ्यर्थियों को आरक्षण देते हुए सामान्य श्रेणी में रखा गया है। जबकि पीटी परीक्षा में आरक्षण देने की सरकार की कोई नीति नहीं है।
