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23 कर्मियों की प्रोन्नति बरकरार, विधानसभा सचिवालय का आदेश रद; झारखंड हाई कोर्ट का फैसला

Published: Thu, 01 Oct 2026 07:31 PM (GMT+05:30)

रांची हाई कोर्ट ने विधानसभा सचिवालय के 23 चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों की जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट पद पर प्रोन्नति बरकरार रखने ...और पढ़ें

प्रोन्नति के लिए ली गई परीक्षा रद करने का मामला, कोर्ट ने आठ सप्ताह में लाभ देने को कहा(

प्रोन्नति के लिए ली गई परीक्षा रद करने का मामला, कोर्ट ने आठ सप्ताह में लाभ देने को कहा(

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने 23 कर्मियों की प्रोन्नति बरकरार रखी।

  2. विधानसभा सचिवालय का प्रोन्नति रद्द करने का आदेश निरस्त।

  3. 97 अंकों की परीक्षा पर रद्द करना मनमाना, अवैध।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने विधानसभा सचिवालय के चतुर्थ वर्ग के 23 कर्मचारियों को राहत देते हुए उन्हें जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट के पद पर दी गई प्रोन्नति जारी रखने का आदेश दिया है।

अदालत ने 100 अंकों के बजाय 97 अंकों की लिखित परीक्षा आयोजित किए जाने के आधार पर पूरी परीक्षा रद करने के विधानसभा सचिवालय के फैसले को मनमाना और अवैध करार दिया है। अदालत ने 13 अक्टूबर 2025 को जारी परीक्षा रद करने संबंधी आदेश को रद करते हुए संबंधित अधिकारियों को आठ सप्ताह में कर्मचारियों को सभी परिणामी लाभ देने का औपचारिक आदेश जारी करने का निर्देश दिया।


विधानसभा सचिवालय में कार्यरत चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट के पद पर प्रोन्नति देने के लिए 29 अगस्त 2025 को सूचना जारी की गई थी। इसके तहत 14 सितंबर 2025 को प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की गई।

16 सितंबर को परीक्षा का परिणाम जारी किया गया और याचिकाकर्ताओं को सफल घोषित किया गया। इसके बाद तीन अक्टूबर 2025 को उन्हें जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट के पद पर प्रोन्नति दी गई। अधिकांश कर्मचारियों ने उसी दिन योगदान भी दे दिया और नए पद पर कार्य शुरू कर दिया।

इसके बाद 13 अक्टूबर 2025 को विधानसभा सचिवालय के उप सचिव ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए परीक्षा रद कर दी। इसके साथ ही कर्मचारियों को दोबारा उनके पुराने ग्रेड के पद पर भेज दिया गया।

100 के बजाय 97 अंकों की परीक्षा पर हुआ विवाद

विधानसभा सचिवालय की ओर से अदालत को बताया गया कि परीक्षा 100 अंकों की होनी थी, लेकिन प्रश्नपत्र 97 अंकों का तैयार हुआ था। सचिवालय ने इसे तकनीकी त्रुटि मानते हुए पूरी परीक्षा प्रक्रिया रद कर दी थी।

कर्मचारियों की ओर से दलील दी गई कि 97 अंकों की परीक्षा सभी अभ्यर्थियों के लिए समान थी। इससे किसी अभ्यर्थी को अलग से कोई लाभ या नुकसान नहीं हुआ। परीक्षा में किसी तरह की धांधली या अनुचित साधन अपनाने का आरोप भी नहीं था। इसके बाद भी पूरी परीक्षा और उसके आधार पर दी गई प्रोन्नति रद कर दी गई।

विभाग की गलती का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना होगा

हाई कोर्ट ने कहा कि परीक्षा 97 अंकों की हुई थी, लेकिन यह व्यवस्था सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू थी। नियमों में लिखित परीक्षा के कुल अंकों की कोई निश्चित संख्या निर्धारित नहीं थी। ऐसे में केवल 100 के बजाय 97 अंकों की परीक्षा आयोजित होने को पूरी परीक्षा रद करने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि कथित तकनीकी कमी विभाग की ओर से हुई थी और उसका याचिकाकर्ताओं से कोई संबंध नहीं था। परीक्षा परिणाम घोषित होने, प्रोन्नति आदेश जारी होने और कर्मचारियों का योगदान स्वीकार किए जाने के बाद पूरी प्रक्रिया को रद करना उचित नहीं था।

पुराने पद पर भेजना रैंक घटाने के समान

अदालत ने यह भी कहा कि प्रोन्नति के बाद कर्मचारियों को उनके पुराने पद पर वापस भेजना उनकी रैंक में कमी किए जाने के समान है। ऐसी कार्रवाई से पहले संबंधित कर्मचारियों को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने, कारण बताने और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था।

इस मामले में ऐसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने 23 याचिकाकर्ताओं को तीन अक्टूबर 2025 से लगातार जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट के पद पर सेवा में बनाए रखने का निर्देश दिया है। एक कर्मचारी का योगदान स्वीकृत अवकाश के कारण 21 अक्टूबर 2025 को हुआ था, इसलिए उसे उसी तिथि से प्रोन्नति के सभी लाभ देने का आदेश दिया गया है।