रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand News झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने गृह सचिव को फटकार लगाते हुए कहा कि अधिकारी कोर्ट के आदेश को गंभीरता से नहीं लेते हैं। इस मामले में राज्य सरकार का रवैया ठीक नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता है। अदालत ने गृह सचिव को इस मामले में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने उन्हें सुनिश्चित कराने को कहा है कि इस तरह के मामले में कोर्ट के आदेश पर समय से जानकारी उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट के आदेश पर गृह सचिव राजीव अरुण एक्का और गुमला के एसपी अदालत में हाजिर हुए थे। अदालत ने कहा कि इस मामले में कई बार सरकार से पूछा गया कि पीड़िता का प्रति परीक्षण कराया गया है या नहीं। लेकिन सरकारी अधिवक्ता इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए। उनका कहना है कि पुलिस विभाग की ओर से इसकी जानकारी नहीं दी जाती है। कोर्ट के आदेश पालन नहीं करना गंभीर बात है।

अदालत ने दोनों अधिकारियों को सुबह साढ़े दस बजे ही अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया था। लेकिन दोनों अधिकारी आधे घंटे बाद कोर्ट पहुंचे। इस पर भी अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है और कहा कि उन्हें निर्धारित समय से अदालत में पहुंचना चाहिए था। मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

इस संबंध दुष्कर्म के आरोपित एमोस किंडो ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। कई सुनवाई से अदालत इस बात की जानकारी मांग रहा था कि इस मामले में पीड़िता का प्रति परीक्षण किया गया है या नहीं। जानकारी नहीं दिए जाने पर कोर्ट ने गृह सचिव और गुमला एसपी को तलब किया था।

Edited By: Sanjay Kumar