राज्य ब्यूरो, रांची। राजद प्रमुख लालू प्रसाद के अस्पताल से घर जाने पर झारखंड हाई कोर्ट ने तल्खी दिखाते हुए इस पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि उन्हें इलाज के लिए औपबंधिक जमानत मिली है, ऐसे में वे घर कैसे जा सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआइ को निर्देश दिया कि लालू प्रसाद की मेडिकल रिपोर्ट व डिस्चार्ज समरी की जांच कर अपना जवाब दाखिल करें। शुक्रवार को जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने इस मामले की सुनवाई की। इसके साथ ही चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद की औपबंधिक जमानत 20 अगस्त तक बढ़ा दी है।

लालू की ओर से अवधि बढ़ाने की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने उक्त टिप्पणी की। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित करते हुए मात्र छह दिन ही औपबंधिक जमानत बढ़ाई है। 14 अगस्त को लालू प्रसाद की औपबंधिक जमानत की अवधि समाप्त हो रही है।

लालू के वकील ने मांगा तीन माह का समय :
लालू के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मुंबई स्थित एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में लालू प्रसाद 6 अगस्त को भर्ती हुए हैं। उनका फिश्चूला (मलद्वार में घाव) का ऑपरेशन हुआ है। जिसकी रिकवरी में समय लगेगा। उन्हें यूरिनल, ब्लड प्रेशर व शुगर सहित अन्य बीमारियां हैं। उनका शुगर कंट्रोल नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें प्रतिदिन 70 इंसुलिन लेनी पड़ रही है। इसके बाद भी शुगर का लेवल 350 हो जा रहा है। लालू प्रसाद को क्रोनिक किडनी की बीमारी है, जिसका ऑपरेशन किया जाना है। इसलिए उनकी औपबंधिक जमानत की अवधि तीन माह तक बढ़ा दी जाए। जिसके बाद कोर्ट ने 20 अगस्त तक औपबंधिक जमानत की अवधि बढ़ाई है।

सीबीआइ ने किया विरोध :
सीबीआइ ने विरोध करते हुए कहा कि लालू की ओर से दाखिल डिस्चार्ज समरी में अस्पताल का मुहर और हस्ताक्षर नहीं है। जिस पर लालू प्रसाद की ओर से कहा गया कि उक्त दस्तावेज अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी। सीबीआइ का कहना था कि लालू की याचिका में उनके फालोअप इलाज के लिए अस्पताल आने की बात कही गई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की बात कहीं नहीं गई। जिस पर कोर्ट ने डिस्चार्ज समरी की जांच कर सीबीआइ को अपना जवाब कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया है।