रांची, राज्य ब्यूरो। नियोजन नीति के तहत राज्य में तृतीय एवं चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाएगी। झारखंड हाई कोर्ट की बड़ी बेंच ने इन नियुक्तियों पर रोक बरकरार रखने का आदेश दिया है। हालांकि, इस दौरान 11 गैर अधिसूचित जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ करने की मांग की गई, लेकिन अदालत ने इससे इन्कार करते हुए पूरी नियुक्ति पर लगी रोक को बरकरार रखा।

दरअसल, नियोजन नीति के तहत राज्य सरकार ने 13 अधिसूचित जिलों में तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के सभी पद स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित कर दिए हैं। इसी को सोनी कुमारी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। पूर्व में इस मामले में सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को जस्टिस एचसी मिश्र, जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले में कहा कि इसी तरह के मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है और 13 फरवरी 2020 को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही हाई कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। वहीं, पूर्व के आदेश के तहत नियुक्ति पर रोक बरकरार रहेगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील संख्या (3602/2002) सिबरोलू लीला प्रसाद बनाम आंध्र प्रदेश के मामले में सुनवाई हो पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है।

यह है मामला

राज्य सरकार ने नियोजन नीति के तहत राज्य के 13 जिलों को अधिसूचित और 11 को गैर अधिसूचित जिला घोषित किया है। इसके तहत 13 अधिसूचित जिलों में तृतीय एवं चतुर्थवर्गीय पद वहीं के निवासियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। पूर्व में खंडपीठ ने कहा था कि शत-प्रतिशत पद आरक्षित करना असंवैधानिक प्रतीत हो रहा है। खंडपीठ ने इस मामले को बड़ी बेंच में सुनवाई के लिए भेजा था। नियोजन नीति के तहत राज्य में हाई स्कूल के शिक्षक एवं अन्य पदों पर नियुक्ति हो रही थी।

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Posted By: Alok Shahi

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