रांची, (राज्य ब्यूरो)। Jharkhand News : झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार और जेपीएससी ने झारखंड हाई कोर्ट से कहा कि वादी की ओर से उठाया गया मुद्दा, बिल्कुल सही है। जेपीएससी की ओर से प्रारंभिक परीक्षा में दिया गया आरक्षण गलत है। इसलिए झारखंड सरकार फिलहाल मुख्य परीक्षा को स्थगित कर रही है। जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की समीक्षा के बाद संशोधि रिजल्ट जारी किया जाएगा।

बता दें कि, कुमार सन्यम की ओर से यह कहते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, कि जेपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दे दिया है। जबकि इस तरह का झारखंड सरकार के पास कोई नियमावली नहीं है।

15 फरवरी को होगी मामले में दोबारा सुनवाई

महाधिवक्ता राजीव रंजन ने सरकार का पक्ष रखा और कहा कि तीन सप्ताह में प्रारंभिक परीक्षा का संशोधन से संबंधित निर्णय के लिए समय दिया जाए। इस पर अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने कहा है कि इसपर अब अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी।

क्‍या कहा था झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2021 में

गुलाम सादिक के मामले में 16 जून 2021 को हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि झारखंड सरकार के अनुसार जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण देने की कोई नीति है। वहीं, वर्ष 2015 में लक्ष्मण टोप्पो के मामले में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा था कि प्रारंभिक परीक्षा में झारखंड सरकार की नीति आरक्षण देने की नहीं है। कोर्ट आरक्षण देने का आदेश नहीं दे सकता। कहा गया कि सामान्य श्रेणी में 114 सीट थी। इसके पंद्रह गुना (1710) परिणाम जारी होना चाहिए, लेकिन मात्र 768 का ही चयन किया गया है। इससे प्रतीत होता है कि प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिया गया है।

कल क्या हुआ था।

कल यानि सोमवार के दिन झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिए जाने के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने जेपीएससी से जवाब मांगा था। अदालत ने जेपीएससी से पूछा था कि सातवीं जेपीएससी में कैटेगरीवाइज कितनी सीटें थी। प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिया गया है या नहीं। वहीं, कितने आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी सामान्य कैटगरी में चयनित हुए हैं। इस सभी बिंदुओं पर जेपीएससी को जवाब देना था।

मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने की हुई थी मांग

इस दौरान मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके बाद अदालत इस मामले में 25 जनवरी यानी मंगलवार को सुनवाई हुई। जिसमें झारखंड सरकार ने झारखंड हाई कोर्ट से कहा कि वादी की ओर से उठाया गया मुद्दा बिल्कुल सही है। जेपीएससी की ओर से प्रारंभिक परीक्षा में दिया गया आरक्षण गलत है। इसलिए झारखंड सरकार फिलहाल मुख्य परीक्षा को स्थगित कर रही है।

सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में दिया गया है आरक्षण

कल हुई सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया था कि सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिया गया है। इसको लेकर न तो विज्ञापन में जिक्र किया गया था और न ही ऐसी नीति झारखंड सरकार ने बनाई है, जिसके अनुसार प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ दिया जा सके।

प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिया गया है, दावा

उन्होंने दावा किया था कि प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिया गया है। सामान्य कैटेगरी की 114 सीट थी। नियमानुसार इसके पंद्रह गुना परिणाम जारी होना चाहिए। इस तरह सामन्य कैटेगरी में 1710 अभ्यर्थियों का चयन होना चाहिए। लेकिन मात्र 768 का ही चयन किया गया है। इससे प्रतीत होता है कि प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण दिया गया है।

सातवीं जेपीएससी की मुख्य परीक्षा 28 जनवरी को थी निर्धारित

इस दौरान उनकी ओर से मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने और प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को रद करने की मांग की गई थी। इस पर जेपीएससी की ओर से जवाब दाखिल करने का समय मांगा गया था। बता दें सातवीं जेपीएससी की मुख्य परीक्षा 28 जनवरी से होनी निर्धारित होनी थी।

Edited By: Sanjay Kumar