'जबरन रिश्ता बनाए रखना सही नहीं', हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला; 6 साल पुराने विवाद में डॉक्टर दंपती का तलाक मंजूर
झारखंड हाई कोर्ट ने एक डॉक्टर दंपति के विवाह को भंग कर दिया है, जिसमें पति के कथित अवैध संबंध ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने डॉक्टर दंपति का विवाह भंग किया।
पति के अवैध संबंध और क्रूरता को आधार माना।
फैमिली कोर्ट का आदेश रद, पत्नी को मिली राहत।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में डॉक्टर दंपति का विवाह भंग कर दिया है।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए हजारीबाग फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें तलाक की याचिका खारिज कर दी गई थी।
हाई कोर्ट ने पति के कथित अवैध संबंध और पत्नी के साथ की गई गंभीर मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना को वैवाहिक क्रूरता माना और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की डिक्री मंजूर कर दी।
दोनों डॉक्टरों का विवाह 24 फरवरी 2018 को हजारीबाग के चरही में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। पति धनबाद के टुंडी स्थित सोनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत थे, जबकि पत्नी बीसीसीएल, धनबाद में चिकित्सक के पद पर कार्यरत थीं।
विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। स्थिति लगातार बिगड़ती गई और पांच सितंबर 2019 से दोनों अलग-अलग रहने लगे।
पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति का एक विधवा महिला के साथ अवैध संबंध था। उसने पति के सामने इसका विरोध किया और संबंध समाप्त करने का आग्रह किया।
पत्नी के अनुसार, पति ने भविष्य में ऐसा आचरण नहीं करने का आश्वासन देते हुए बॉन्ड भी भरा, लेकिन इसके बाद भी उसके व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ।
पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति की प्रताड़ना के कारण उसे गंभीर शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा तथा स्लिप-डिस्क जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या भी उत्पन्न हुई। फैमिली कोर्ट से तलाक की राहत नहीं मिलने के बाद पत्नी ने हाई कोर्ट में अपील दायर की।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मामले में पेश किए गए साक्ष्य और परिस्थितियों की समीक्षा की। कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्य का समुचित और सही मूल्यांकन नहीं किया था।
2019 से अलग रह रहे पति-पत्नी
हाई कोर्ट ने गौर किया कि सितंबर 2019 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। पति के आचरण और लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद से यह स्पष्ट है कि दोनों के बीच वैवाहिक संबंधों में विश्वास और आपसी सामंजस्य गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका है।
ऐसी परिस्थितियों में वैवाहिक संबंध को जबरन बनाए रखना उचित नहीं है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद करते हुए पत्नी के पक्ष में तलाक की डिक्री पारित कर दी।
साथ ही अदालत ने पत्नी को भरण-पोषण और गुजारा भत्ता के लिए फैमिली कोर्ट के समक्ष आवेदन देने की स्वतंत्रता भी प्रदान की।
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