रांची, राज्‍य ब्‍यूरो। मनी लांड्रिंग मामले में झारखंड के पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य सचिव प्रदीप कुमार काे झारखंड हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। ईडी से जुड़े मामले में आरोपी झारखंड सरकार के पूर्व स्वास्थ्य सचिव प्रदीप कुमार को हाई कोर्ट से शुक्रवार को जमानत मिल गई। प्रदीप कुमार उनके भाई और सहयोगी श्यामल चक्रवर्ती को शर्तों के साथ बेल दिया गया है। उच्‍च न्‍यायालय ने आरोपियों को पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत दी है।

हाई कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत को 18 नवंबर तक चार्ज प्रेम करने का आदेश दिया है। बता दें कि 1.76 करोड़ रुपये के मनी लांड्रिंग मामले में पूर्व स्वास्थ्य सचिव डॉ प्रदीप कुमार एवं उनके भाई राजेंद्र कुमार ने जून महीने में ईडी की विशेष अदालत में सरेंडर किया था। यहां से दोनों भाइयों को जेल भेज दिया गया था।

18 नवंबर तक इन पर आरोप गठित करने का आदेश
झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एबी सिंह की अदालत से मनी लांड्रिंग के आरोपित पूर्व स्वास्थ्य सचिव डॉ. प्रदीप कुमार, उनके भाई राजेंद्र कुमार और सहयोगी श्यामल चक्रवर्ती को राहत मिल गई है। अदालत ने सभी को निचली अदालत में पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत की सुविधा प्रदान की है। इसके अलावा तीनों लोगों को 25-25 रुपये का निजी मुचलका भी भरना होगा। अदालत ने 18 नवंबर तक इन पर आरोप गठित करने का आदेश दिया है। डॉ. प्रदीप कुमार सहित तीनों की ओर से हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। दरअसल 1.76 करोड़ रुपये के मनी लांड्रिंग मामले में ईडी जांच कर रही है। जून माह में इन लोगों ने ईडी कोर्ट में सरेंडर किया था, जहां से इन्हें जेल भेज दिया गया था।

पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के मामले में मांगी स्टेट्स रिपोर्ट
झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एबी सिंह की अदालत ने बड़कागांव गोलीकांड में आरोपित पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार को केस की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता देवाशीष सोरेन ने अदालत को बताया कि मामले के सूचक ने अपने बयान में कहा है कि घटना के दिन एक अक्टूबर 2016 को पूर्व मंत्री योगेंद्र साव घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। बयान की सत्यापित प्रति अदालत के समक्ष प्रस्तुत भी की गई। इसके बाद अदालत ने सरकार से केस की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की ओर से जमानत के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

सूचना आयुक्त की नियुक्ति पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
हाई कोर्ट में राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस एचसी मिश्र व जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार से पूछा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था, उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है? यह प्रक्रिया किस स्टेज में है? सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्र ने खंडपीठ को बताया कि सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त को छोड़ कर सभी आयुक्तों का पद वषरें से रिक्त है और लगभग 26000 अपील मामले लंबित हैं। विधानसभा चुनाव होना है, उसे बहाना बना कर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को टाल दिया जाएगा। इस पर अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है। बता दें कि राजकुमार ने जनहित याचिका दायर कर सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की माग की है।

ढुलू महतो के मामले में गवाह ने लगाई सुरक्षा की गुहार
भाजपा विधायक ढुलू महतो पर यौन शोषण के मामले में गवाह भाजपा नेता विनय कुमार सिंह ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। याचिका में कहा गया है कि दो दिन पहले बोकारो से रांची आने के दौरान ढुलू महतो के समर्थकों ने ट्रेन में उन पर जानलेवा हमला किया है। यह हमला इसलिए किया गया, क्योंकि वह ढुलू महतो पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला की ओर से गवाह हैं। इस मामले में उनके अधिवक्ता राजीव कुमार ने अदालत से विशेष सुनवाई का आग्रह किया गया, लेकिन अदालत ने इस मामले को सोमवार को तथ्यों से साथ अदालत में रखने का निर्देश दिया।

एक लाख जुर्माने की शर्त पर डॉ. आरके राणा को जमानत
चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता पूर्व सांसद डॉ. आरके राणा को हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने एक लाख रुपये जुर्माने की शर्त पर उन्हें जमानत प्रदान की है। इस आदेश के बाद अब वे जेल से बाहर निकल पाएंगे। डॉ. आरके राणा की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर जमानत की गुहार लगाई गई थी। सीबीआइ की विशेष अदालत ने चाईबासा मामले में उन्हें पांच साल की सजा सुनाई है। इसी आदेश के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में अपील भी दाखिल की है। सुनवाई के दौरान आरके राणा की ओर से अदालत को बताया गया कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा की आधी अवधि उन्होंने जेल में काट दी है, इसलिए उन्हें जमानत की सुविधा मिलनी चाहिए। अदालत ने प्रार्थी के आग्रह को स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत प्रदान कर दी।

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Posted By: Alok Shahi

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