यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 03, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
JPSC 10th Exam: जेपीएससी नियुक्ति परीक्षा में मूल्यांकन को लेकर दाखिल याचिका खारिज, कोर्ट ने क्या कहा?
झारखंड उच्च न्यायालय ने दसवीं जेपीएससी नियुक्ति परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की पीठ में दसवीं जेपीएससी नियुक्ति के परिमाण को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत देरी से याचिका दाखिल करने पर प्रार्थियों की याचिका खारिज कर दी। इस संबंध में प्रार्थी आयुब तिर्की और राजेश प्रसाद की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि जेपीएससी की ओर से वर्ष 2014 में संयुक्त सिविल सेवा के लिए जेपीएससी की ओर से विज्ञापन जारी किया गया था। इस परीक्षा में प्रार्थी भी शामिल हुए, लेकिन आयोग की ओर से अभ्यर्थियों के अंक का मूल्यांकन नियमानुसार नहीं किया गया है।
इसके अलावा, मूल्यांकन करने वालों की शैक्षणिक योग्यता नियमानुसार नहीं है। ऐसे में जेपीएससी की ओर से जारी परिणाम को निरस्त कर देना चाहिए।
जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि डिजिटल रूप में मूल्यांकन करने की जानकारी सभी अखबारों में प्रकाशित की गई थी। ऐसे में प्रार्थी का यह कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। यह पूरी तरह से गलत है। प्रार्थी की ओर से इससे संबंधित पेपर कटिंग को अपनी याचिका में संलग्न किया गया है।
परिणाम जारी करने के काफी दिनों बाद याचिका दाखिल की गई है, जबकि आयोग की ओर से चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जा रहा है। इस पर अदालत ने कहा कि देरी से याचिका दाखिल करना सही नहीं है, जबकि आपको पता था कि जेपीएससी की ओर से डिजिटल रूप में मूल्यांकन किया जा रहा है तो उसी समय चुनौती दी जानी चाहिए थी। अदालत इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
