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औद्योगिक प्रदूषण पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, फैक्ट्रियों की साल में दो बार होगी जांच

Published: Mon, 14 Sep 2026 09:00 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने रामगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी याचिका पर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) को नियमित और प्रभावी निगरानी के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने कहा- पर्यावरणीय नुकसान किसी जिले की सीमा तक सीमित नहीं रहता।

अदालत ने कहा- पर्यावरणीय नुकसान किसी जिले की सीमा तक सीमित नहीं रहता।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने रामगढ़ प्रदूषण पर जेएसपीसीबी को निगरानी का निर्देश दिया।

  2. औद्योगिक इकाइयों की साल में दो बार जांच, एक बिना सूचना के होगी।

  3. प्रदूषण स्तर अधिक होने पर सात दिन में शो-काज नोटिस जारी होगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने रामगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी जनहित याचिका का निपटारा करते हुए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) को नियमित और प्रभावी निगरानी के निर्देश दिया है। खंडपीठ ने 27 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सोमवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि फिलहाल दोनों औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ पर्यावरण कानून के लगातार उल्लंघन का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन निगरानी व्यवस्था में कमियां सामने आई है। अदालत ने जेएसपीसीबी के क्षेत्रीय पदाधिकारी, हजारीबाग को बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड की साल में दो बार जांच करने का निर्देश दिया है।

दोनों इकाइयों में कम से कम एक निरीक्षण बिना पूर्व सूचना के होगा। जांच में चिमनी से निकलने वाले उत्सर्जन, अपशिष्ट और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की कार्यप्रणाली शामिल होगी। निरीक्षण की रिपोर्ट दो सप्ताह में बोर्ड के सदस्य सचिव को देनी होगी।

कोर्ट ने दोनों इकाइयों के सतत उत्सर्जन निगरानी सिस्टम को बोर्ड के सर्वर से जोड़कर रखने का निर्देश दिया है। 48 घंटे से अधिक समय तक प्रदूषण स्तर निर्धारित सीमा से ऊपर रहने पर सात दिनों के भीतर शो-काज नोटिस जारी करना होगा।

खंडपीठ ने कहा कि पर्यावरणीय नुकसान किसी जिले की सीमा तक सीमित नहीं रहता है। प्रदूषण का प्रभाव दूर-दराज के क्षेत्रों और लोगों तक पहुंच सकता है।विवा इंटरनेशनल स्कूल के आसपास पानी में फ्लोराइड, टीडीएस और नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से थोड़ा अधिक मिलने पर अदालत ने तीन महीने में मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से दोबारा जांच का निर्देश दिया है।

दामोदर नदी के मामले में औद्योगिक क्षेत्र के ऊपर और नीचे से भी नमूने लिए जाएंगे। प्रदूषण औद्योगिक इकाइयों से साबित होने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई होगी।

कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। साथ ही राज्य को चार महीने में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।