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शिक्षक नियुक्ति मामले में झारखंड HC ने खारिज की पुनर्विचार याचिका, 15 शिक्षकों के स्थानांतरण पर डीसी लेंगे निर्णय

Published: Mon, 12 Oct 2026 07:06 PM (GMT+05:30)

झारखंड हाई कोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति मामले में नागेंद्र नाथ परिहार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी, जो ...और पढ़ें

अदालत ने एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप से किया इन्कार।

अदालत ने एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप से किया इन्कार।

HighLights

  1. स्नातक शिक्षक नियुक्ति पुनर्विचार याचिका हाई कोर्ट ने खारिज की।

  2. याचिका 14 माह देरी से दाखिल होने के कारण खारिज हुई।

  3. लोहरदगा में 15 शिक्षकों के स्थानांतरण पर डीसी करेंगे फैसला।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस एके राय की अदालत ने हाई स्कूलों में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति से जुड़े मामले में नागेंद्र नाथ परिहार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया।

अदालत ने कहा कि पुनर्विचार याचिका 14 माह देरी से दाखिल की गई है। जेएसएससी ने एकल पीठ को बताया था कि सत्यजीत कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो अगस्त 2022 के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट के आधार पर विचार किया गया था।

याचिकाकर्ता ने बीसी-2 श्रेणी के तहत आवेदन किया था, लेकिन राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट में बीसी-1 और बीसी-2 श्रेणियों के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों की तुलना में उसके अंक कम थे। इस कारण उसका चयन नहीं हो सका।

आयोग की इस दलील के आधार पर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद नागेंद्र नाथ परिहार ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ में अपील दाखिल की थी।

खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई के बाद एकल पीठ के आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद प्रार्थी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।

15 शिक्षकों के स्थानांतरण पर लोहरदगा उपायुक्त को निर्णय लेने का आदेश

हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में लोहरदगा में 15 शिक्षकों को अतिरिक्त बताते हुए दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में लोहरदगा के उपायुक्त को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

अदालत ने उपायुक्त को निर्देश दिया है कि शिक्षकों की याचिका को संयुक्त अभ्यावेदन मानते हुए कानून और लागू नियमों के अनुसार उचित निर्णय लें। साथ ही स्पष्ट किया है कि जब तक इस अभ्यावेदन पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वर्ष 2023 का स्थानांतरण आदेश लागू नहीं किया जाएगा, यदि वह अब तक लागू नहीं हुआ है।

शिक्षकों की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता मनोज टंडन और सिद्धार्थ रंजन ने बताया गया कि जिला लोहरदगा के जिला शिक्षा अधीक्षक ने 27 जुलाई 2023 को पत्र जारी कर उन्हें अलग-अलग स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक घोषित करते हुए स्थानांतरण का आदेश दिया था।

हालांकि, करीब तीन साल बीतने के बाद भी इस आदेश को लागू नहीं किया गया है। अदालत से इस आदेश को रद करने की मांग की गई थी। सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया में निजी व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका को भी चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान शिक्षकों के अधिवक्ता ने कहा कि आदेश अब तक लागू नहीं हुआ है। ऐसे में न्यायहित में संबंधित अधिकारियों को याचिका को अभ्यावेदन मानकर नियमानुसार फैसला लेने का निर्देश दिया जा सकता है। राज्य सरकार की ओर से भी कहा गया कि शिक्षक संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं।