51 बच्चों की तस्करी के आरोपी को नहीं मिली जमानत, भीख मांगने और वेश्यावृत्ति जैसे अवैध धंधों में धकेला
झारखंड हाई कोर्ट ने 51 बच्चों की तस्करी के आरोपी विरोढ़ी खेरवार उर्फ अनुराग की जमानत याचिका खारिज कर दी ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका, कहा- आरोप गंभीर, नहीं दे सकते जमानत।
HighLights
हाई कोर्ट ने 51 बच्चों की तस्करी मामले में जमानत खारिज की।
आरोपी विरोढ़ी खेरवार उर्फ अनुराग पर गंभीर आरोप हैं।
अदालत ने उसे बच्चों की तस्करी गिरोह का सक्रिय सदस्य माना।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने 51 मासूम बच्चों की तस्करी कर उन्हें भीख मांगने और वेश्यावृत्ति जैसे अवैध धंधों में धकेलने के गंभीर मामले में आरोपित विरोढ़ी खेरवार उर्फ अनुराग की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए रांची के विशेष पोक्सो कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
आरोपित 18 जनवरी से जेल में बंद है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि बरामद बच्चे उसके रिश्तेदार हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि आरोपित अन्य मामलों में बरी हो चुका है और लंबे समय से जेल में है, इसलिए उसे जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत का कड़ा विरोध किया गया। सरकार की ओर से बताया गया कि आरोपित को सिठियो के पास एक वाहन से बच्चों के साथ पकड़ा गया था। इसके अलावा उसके रामगढ़ स्थित कोठार के घर से भी कई बच्चों को बरामद किया गया था।
अभियोजन का आरोप है कि आरोपित बच्चों की चोरी और तस्करी करने वाले गिरोह का सक्रिय सदस्य है। हाई कोर्ट ने केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपित बरामद बच्चों को अपना रिश्तेदार होने का दावा प्रमाणित करने में असफल रहा।
अदालत ने प्रथमदृष्टया उपलब्ध साक्ष्य और मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपित की भूमिका को गंभीर माना। खंडपीठ ने कहा कि मामले में आरोपित की भूमिका बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य के रूप में सामने आती है।
अपराध की प्रकृति, बच्चों की बरामदगी और केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को देखते हुए उसे जमानत देना उचित नहीं होगा। इसके बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
अफीम तस्करी मामले में दो को सात-सात साल कारावास
अपर न्यायायुक्त शैलेंद्र कुमार की अदालत ने बुधवार को अवैध अफीम परिवहन मामले में दोषी करार अभियुक्त दिगम महतो और झारीराम महतो को सात-सात साल कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
जुर्माना नहीं देने पर दोनों को अतिरिक्त एक साल की सजा काटनी होगी। अदालत ने दोनों को उक्त आरोप में 18 सितंबर को दोषी करार दिया था। दोनों को पुलिस ने पांच अप्रैल 2024 को 1.2 किलोग्राम अफीम के साथ गिरफ्तार किया था। जब तमाड़ थाना के सहायक अवर निरीक्षक सिरिल संगा को गुप्त सूचना मिली।
पुलिस ने रोलाडीह और बुरुसिंगु के बीच ईंट भट्ठे के पास छापेमारी कर दिगम महतो और सह-आरोपी झारीराम महतो को पकड़ा। तलाशी के दौरान दिगम महतो के पास से 1200 ग्राम अफीम बरामद हुई।
वैध कागजात पेश न करने पर पुलिस ने धारा 50 एनडीपीएस एक्ट के प्रविधानों का पालन करते हुए जब्ती सूची बनाई और तमाड़ थाना में मामला दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से ठोस गवाही पेश किया गया है।
