सफाई मोहर्रिरों के पद सृजित कर नियमित करें, दशकों तक काम लेने के बाद 'पद नहीं होने' का तर्क उचित नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाई कोर्ट ने ने कहा कि विज्ञापन से नियुक्त और दो दशक से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों को ...और पढ़ें

अदालत ने सरकार को दिया निर्देश, दुमका का मामला।
HighLights
हाई कोर्ट ने दुमका के सफाई मोहर्रिरों के नियमितीकरण पर सरकार को निर्देश दिया।
अदालत ने कहा, काम की निरंतरता देख पद सृजित कर नियमित करें।
विज्ञापन से नियुक्त कर्मचारियों को नियमावली के आधार पर खारिज करना गलत।
राज्य ब्यूरो, जागरण. रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने दुमका के बंदोबस्त कार्यालय में लंबे समय से कार्यरत आठ सफाई मोहर्रिरों के नियमितीकरण के मामले में राज्य सरकार को उनके काम की निरंतरता और आवश्यकता का आकलन कर पद सृजित करने और उसके बाद नियमितीकरण के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि कर्मचारी वर्ष 2015 की नियमितीकरण नियमावली और उसके 2019 के संशोधन के दायरे में नहीं आते, उनके नियमितीकरण के दावे को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के बाद हुई थी और वे दो दशक से अधिक समय से भूमि अभिलेख तैयार करने एवं उनके रखरखाव से संबंधित कार्य कर रहे हैं।
स्वीकृत पद नहीं होने के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता
याचिकाकर्ताओं ने छह अप्रैल 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत दुमका के डिप्टी कलेक्टर (स्थापना) ने उनके नियमितीकरण की अनुशंसा यह कहते हुए वापस कर दी थी कि जिस पद पर वे कार्यरत हैं, वह स्वीकृत पद नहीं है। राज्य सरकार की ओर से भी अदालत में यही तर्क दिया गया कि स्वीकृत पद के अभाव में नियमितीकरण नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि उनकी नियुक्ति विज्ञापन के माध्यम से हुई और वे लंबे समय से भूमि अभिलेखों के रखरखाव जैसे कार्य में लगे हैं। ऐसे में उनके कार्य की प्रकृति स्थायी आवश्यकता वाली प्रतीत होती है।
दशकों तक काम लेने के बाद पद नहीं होने का तर्क उचित नहीं
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य लंबे समय तक किसी व्यक्ति से काम लेने के बाद केवल यह कहकर नियमितीकरण से इन्कार नहीं कर सकता कि स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं हैं।
स्वीकृत पदों का सृजन राज्य को संबंधित कार्य की आवश्यकता का तार्किक आकलन करने के बाद करना होता है। अदालत ने प्रार्थियों को निर्देश दिया है कि संबंधित आवश्यक जानकारी तीन महीने में दुमका के बंदोबस्त पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें।
