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माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा पर झारखंड HC सख्त, मुख्य सचिव को प्राथमिकी दर्ज कराने और CID को जांच सौंपने का निर्देश

By Manoj SinghEdited By: Mansi Kumari
Published: Sat, 29 Aug 2026 01:09 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति मामले में दोबारा परीक्षा के खिलाफ याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने मुख्य ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. माध्यमिक आचार्य नियुक्ति मामले में हाई कोर्ट की सुनवाई।

  2. मुख्य सचिव को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (विज्ञापन संख्या 2/2025) के तहत 2,819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा लिए जाने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को मामले में आपराधिक मामला दर्ज कर सीआईडी से जांच कराने का निर्देश दिया है। साथ ही जेएसएससी को निर्देश दिया है कि जिन 2,819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा ली गई है, उनके पूर्व में आयोजित परीक्षा के अंक भी प्रकाशित किए जाएं।

यदि सीआईडी की जांच में इन अभ्यर्थियों के विरुद्ध कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आता है और वे निर्धारित मेरिट में आते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर भी विचार किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सीआईडी जांच के निष्कर्ष के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी।

सीआईडी जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनका असर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया और उसके परिणाम पर पड़ेगा। सीआईडी जांच में अगर जेएसएससी के किसी कर्मचारी को दोषी पाया जाता है तो आयोग उस कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करेगा।

इस संबंध में प्रार्थी अर्पणा कुमारी एवं अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में 2,819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा लेने के लिए जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी। अभ्यर्थियों के कंप्यूटर हैक किए जाने की बात कह जेएसएससी ने इन अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा लेने का निर्णय लिया था, जिसके विरुद्ध अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की थी।

जेएसएससी ने दर्ज नहीं कराई प्राथमिकी, कोर्ट ने कहा- जांच होना जरूरी

अदालत ने कहा कि झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के नियंत्रण और रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2023 के तहत आपराधिक मुकदमा चलाना अनिवार्य है, लेकिन जेएसएससी ने अब तक कोई प्राथमिकी नहीं दर्ज कराई है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जांच नहीं हुई तो असली दोषी बच निकलेंगे और भविष्य की परीक्षाओं में भी इस तरह की गड़बड़ी होती रहेगी अदालत ने पूरी चयन प्रक्रिया को रद करने से इन्कार कर दिया, क्योंकि कई अभ्यर्थी पहले ही दोबारा परीक्षा में शामिल हो चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा

कंप्यूटर से छेड़छाड़ होना अभ्यर्थियों की गलती नहीं

प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि एक बार परीक्षा आयोजित होने के बाद केवल कुछ अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा लेना उचित नहीं है।

इसमें अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं है, क्योंकि उन्होंने आयोग की ओर से निर्धारित केंद्र पर परीक्षा दी है, अगर कंप्यूटर में कोई छेड़छाड़ हुई है, तो यह लगाने वाली एजेंसी की गलती होनी चाहिए। दोबारा परीक्षा लेने से सभी परीक्षार्थियों के साथ समान व्यवहार नहीं होगा।

कंप्यूटर में बाहरी हस्तक्षेप की मिली जानकारी

आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने अदालत को बताया कि परीक्षा आनलाइन कंप्यूटर आधारित आयोजित हुई थी।

परीक्षा में किसी तरह की बाहरी दखलंदाजी या सिस्टम से छेड़छाड़ का पता लगाने के लिए सभी कंप्यूटर में साफ्टवेयर से निगरानी की गई थी। परीक्षा में करीब 25 हजार अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे। इनमें 2,819 अभ्यर्थियों के परीक्षा देने वाले कंप्यूटर सिस्टम में बाहरी प्रभाव पाए गए थे।

इसके बाद इन अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिका (आंसर की) को लाक कर दिया गया था। आयोग ने संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके कंप्यूटर सिस्टम के प्रभावित होने में उनकी कोई संलिप्तता थी या नहीं। अभ्यर्थियों से इस संबंध में शपथपत्र भी लिया गया। इसके बाद आयोग ने इन सभी अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया।

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