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पत्नी पर प्रेमिका को घर में साथ रखने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता, झारखंड हाई कोर्ट ने किया तलाक मंजूर

Published: Wed, 28 Oct 2026 09:30 AM (IST)

रांची हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक याचिका खारिज करने के फैसले को पलट दिया है। अदालत ने पति ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को किया खारिज, तलाक को दी मंजूरी।

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को किया खारिज, तलाक को दी मंजूरी।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने निचली अदालत का तलाक आदेश खारिज किया।

  2. पति का विवाहेत्तर संबंध गंभीर मानसिक क्रूरता माना गया।

  3. पत्नी पर प्रेमिका संग रहने का दबाव भी क्रूरता।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट ने कहा कि पति का विवाहेत्तर संबंध और पत्नी पर प्रेमिका को छोटी बहन मानकर उसके साथ रहने का दबाव बनाना गंभीर मानसिक क्रूरता है। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने पत्नी की तलाक याचिका खारिज करने के फैमिली कोर्ट के फैसले को पलट दिया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद का आदेश दिया।

हाई कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता आपसी विश्वास, सम्मान और साथ निभाने की भावना पर आधारित होता है। जब विवाह की बुनियाद ही विश्वास टूटने से कमजोर हो जाए, तो साथ रहना मुश्किल हो सकता है।

पत्नी ने हजारीबाग फैमिली कोर्ट के 17 नवंबर 2023 के फैसले को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग वाली उसकी याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्य का समग्र आकलन करने के बजाय अलग-अलग पहलुओं पर विचार किया था।

परिवार के हस्तक्षेप के बाद भी जारी रहा विवाहेतर संबंध

पति और पत्नी दोनों पेशे से चिकित्सक हैं। दोनों का विवाह 24 फरवरी 2018 को हुआ था और वे बाद में धनबाद में साथ रहने लगे थे। पति टुंडी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत था, जबकि पत्नी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) में काम करती थी।

दोनों पांच सितंबर 2019 से अलग रह रहे थे। पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसके पति का जूली नाम की एक विधवा महिला से विवाहेतर संबंध था। पत्नी और परिवार के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई थी।

इसके बाद पति ने कथित तौर पर भविष्य में ऐसा नहीं करने का आश्वासन देते हुए एक बंधपत्र भी दिया था। पत्नी के अनुसार, आश्वासन के बाद भी संबंध जारी रहा।

मारपीट से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने का आरोप

पत्नी ने पति पर घर में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं से बार-बार मारपीट करने का आरोप भी लगाया था। उसका कहना था कि इस कारण उसे स्लिप डिस्क और ट्रामैटिक आस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हुईं। पत्नी ने इन घटनाओं और पति के विवाहेत्तर संबंध को मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना का आधार बताते हुए तलाक की मांग की थी।

इस बीच, पति ने जनवरी 2022 में वैवाहिक जीवन फिर से शुरू कराने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। जनवरी 2023 में इस मामले में एकतरफा आदेश पारित हुआ। पत्नी ने अप्रैल 2022 में तलाक की याचिका दायर की थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

लंबे समय तक अलग रहना भी मानसिक क्रूरता का आधार

हाई कोर्ट ने कहा कि पति के व्यवहार, कथित मारपीट और विवाहेतर संबंध को लेकर सामने आए तथ्यों पर एक साथ विचार करना जरूरी था। अदालत ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने साक्ष्य के समग्र प्रभाव को नजरअंदाज किया।

अदालत ने कहा कि पति-पत्नी का 2019 से अलग रहना भी मामले की परिस्थितियों में महत्वपूर्ण था। पति के आचरण से वैवाहिक विश्वास को गहरा आघात पहुंचा और पत्नी को वैवाहिक घर छोड़ना पड़ा।