RIMS में नियुक्तियों, उपकरणों और मरम्मत में देरी पर झारखंड HC सख्त; एक करोड़ से अधिक की खरीद की समीक्षा
झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स में नियुक्तियों, चिकित्सा उपकरणों की खरीद और जर्जर भवनों की मरम्मत में हो रही देरी ...और पढ़ें

अदालत ने पूछा- पूर्व में दिए गए आदेशों का क्यों नहीं हुआ पालन।
HighLights
रिम्स में नियुक्तियों, उपकरणों और भवनों की मरम्मत में देरी।
हाई कोर्ट ने रिम्स के कार्यों में देरी पर जताई नाराजगी।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव से मांगा विस्तृत जवाब।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में रिम्स में लंबित नियुक्तियों, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और जर्जर भवनों की मरम्मत को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने इन कार्यों में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई।
खंडपीठ ने रिम्स के 21 जुलाई को दायर शपथ पत्र को असंतोषजनक बताया और कहा कि पूर्व में दिए गए समय विस्तार के बाद भी महत्वपूर्ण कार्य पूरे नहीं किए गए हैं। खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि नियुक्तियां, उपकरणों की खरीद और जर्जर भवनों की आपातकालीन मरम्मत जैसे आवश्यक कार्य अब तक क्यों पूरे नहीं हो सके। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की गई है।
अदालत ने रिम्स से कहा कि 18 फरवरी 2026 को रिम्स के अनुरोध पर विभिन्न लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए तीन से छह माह तक का अतिरिक्त समय दिया गया था। इसके बाद भी अधिकांश कार्य निर्धारित अवधि में पूरे नहीं हो सके।
रिम्स में चिकित्सा संवर्ग (मेडिकल कैडर) के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए पहले 10 अक्टूबर 2025 से दो माह की समय सीमा तय की गई थी। बाद में रिम्स ने इसके लिए छह माह का अतिरिक्त समय मांगा था। इसी तरह सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर की नियुक्ति के लिए निर्धारित दो माह की अवधि बढ़ाकर तीन माह करने का अनुरोध किया गया था।
तृतीय वर्ग, नर्सिंग और चतुर्थ वर्ग के रिक्त पदों पर भी नियुक्ति के लिए भी दो माह का समय कोर्ट ने दिया था। लेकिन रिम्स ने छह माह का समय मांगा था। मशीनरी एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए प्रारंभिक एक माह की समय सीमा निर्धारित थी, लेकिन रिम्स ने प्रक्रिया जारी रहने का हवाला देते हुए छह माह का अतिरिक्त समय मांगा था।
वहीं, रिम्स भवनों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के संबंध में संस्थान ने अदालत को बताया था कि यह कार्य झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा कराया जाना है। जर्जर भवनों की आपातकालीन मरम्मत के लिए भी निर्धारित चार माह की अवधि बढ़ाकर छह माह करने का अनुरोध किया गया था।
अदालत ने स्वास्थ्य विभाग से विस्तृत जवाब तलब करते हुए यह स्पष्ट करने को कहा कि समय विस्तार दिए जाने के बाद भी कार्यों में अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं हुई।
रिम्स में एक करोड़ से अधिक की खरीद की होगी समीक्षा
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें पिछले स्थायी वित्त समिति (एसएफसी) में एक करोड़ रुपये से अधिक की खरीद से जुड़े सभी मामलों की सूची तैयार करने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही पीटीए एवं बीईआरए की दरें निर्धारित करने तथा एपीएस के मानदंड ग्रिवांस कमेटी से तय कराने का भी निर्णय लिया गया।
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