विस्फोटक मामले में ट्रक मालिक की जमानत खारिज, झारखंड हाई कोर्ट ने कारतूस बरामदगी मामले में सजा घटाई
झारखंड हाई कोर्ट ने विस्फोटक मामले में 10 साल की सजा पाए ट्रक मालिक सुल्तान वाहिद की जमानत याचिका खारिज ...और पढ़ें

अदालत ने कहा- ट्रक में विस्फोटक लदे होने की जानकारी नहीं होने का बहाना नहीं चलेगा।
HighLights
विस्फोटक मामले में ट्रक मालिक सुल्तान वाहिद की जमानत याचिका खारिज।
हाई कोर्ट ने कहा, विस्फोटक की जानकारी न होने का बहाना अस्वीकार्य।
आर्म्स एक्ट के दोषी नारायण यादव की सजा हाई कोर्ट ने घटाई।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थों की बरामदगी के मामले में 10 साल की सजा पाए ट्रक मालिक सुल्तान वाहिद को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। वहीं, एक अन्य मामले में कोर्ट ने 26 साल पुराने आर्म्स एक्ट के तहत दो कारतूस बरामदगी के दोषी नारायण यादव की एक साल की सजा को घटाकर पहले से जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दिया।
अदालत ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि ट्रक मालिक को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके वाहन से बड़ी संख्या में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक पदार्थ ले जाए जा रहे थे। निचली अदालत से मिली सजा के खिलाफ सुल्तान वाहिद की ओर से अपील के साथ जमानत याचिका दाखिल की गई थी।
अदालत ने पाया कि अभियुक्त को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4(आइ) और 5(ए) के तहत दोषी ठहराया गया है और दोनों धाराओं में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। पुलिस ने एक ट्रक को रोककर तलाशी ली थी।
तलाशी के दौरान ट्रक से बड़ी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए थे। ट्रक चालक और खलासी को मौके पर पकड़ा गया था। अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह ट्रक में मौजूद नहीं था और केवल ट्रक का मालिक होने के कारण उसे मामले में आरोपित बनाया गया है।
यह भी कहा गया कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके ट्रक का इस्तेमाल विस्फोटक पदार्थों के परिवहन में किया जा रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रक से भारी मात्रा में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए थे।
ऐसे में यह कहना कि ट्रक मालिक को इसकी जानकारी नहीं थी, स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। बता दे कि यह मामला दुमका के काठीकुंड थाना से जुड़ा है।
कारतूस बरामदगी मामले में हाई कोर्ट ने सजा घटाई
झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस पीके श्रीवास्तव की अदालत ने आर्म्स एक्ट के 26 साल पुराने मामले में नारायण यादव को राहत दी है। अदालत ने एक साल की सजा को उसके द्वारा पहले से जेल में बिताई गई करीब चार माह की अवधि तक सीमित कर दिया। मामला वर्ष 2000 का है।
दो अक्टूबर की रात कुंडा पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ अपराधी डकैती की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस ने करनिजोर पुल के पास छापेमारी कर नारायण यादव सहित अन्य लोगों को पकड़ा था। तलाशी के दौरान नारायण के पास से .315 बोर के दो जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।
ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2005 में उसे आर्म्स एक्ट में दोषी ठहराया था। हाई कोर्ट ने कहा कि दो जिंदा कारतूस की बरामदगी से आर्म्स एक्ट का अपराध साबित होता है।
लेकिन आर्म्स एक्ट की धारा 26(1) के लिए हथियार या कारतूस को गुप्त रूप से रखने का तत्व साबित होना जरूरी है। सामान्य तलाशी में बरामदगी को गुप्त उल्लंघन नहीं माना जा सकता। 26 साल लंबे मुकदमेबाजी को देखते हुए अदालत ने सजा की अवधि भी घटा दी।
