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झारखंड में सिविल जज नियुक्ति रद मामला एकल पीठ में, विधि अधिकारी नियमावली पर फैसला सुरक्षित

Published: Mon, 05 Oct 2026 08:26 PM (IST)

रांची हाई कोर्ट ने सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा रद करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका एकल पीठ ...और पढ़ें

सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा रद करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका एकल पीठ को भेजी है।

सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा रद करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका एकल पीठ को भेजी है।

HighLights

  1. सिविल जज नियुक्ति रद्द करने का मामला एकल पीठ को भेजा।

  2. विधि अधिकारी नियुक्ति नियमावली-2026 पर हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।

  3. दोनों मामलों में झारखंड हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत में सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा की नियुक्ति प्रक्रिया रद करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को एकल पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया। इस संबंध में आशुतोष श्रीवास्तव की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। प्रार्थी ने सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा की नियुक्ति प्रक्रिया रद करने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी है।

सीआइडी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने उन परीक्षाओं को रद करने का निर्णय लिया था, जिनमें टीडीपीएल की संलिप्तता सामने आई थी। इसके साथ ही वर्ष 2014 से आयोजित विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की गई थी।

विधि अधिकारी नियुक्ति नियमावली मामले में फैसला सुरक्षित

हाई कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से लागू की गई झारखंड विधि अधिकारी नियुक्ति नियमावली-2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

अधिवक्ता लाल ज्ञान रंजन नाथ शाहदेव की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर झारखंड विधि नियुक्ति नियमावली-2026 के तहत विधि अधिकारी के पदों पर आवेदन आमंत्रित किए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

याचिका में नई नियमावली के प्रविधानों और उसके तहत शुरू की गई नियुक्ति प्रक्रिया को असंवैधानिक एवं विधिसम्मत नहीं होने का दावा किया गया है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता ऋतु कुमार ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।