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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में पिता और उसके साथी को मिली बड़ी राहत, बोकारो कोर्ट की सजा रद

Published: Wed, 21 Oct 2026 06:49 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पिता सहित दो सजायाफ्ता को निचली अदालत की सजा रद्द ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने कहा- पीड़िता के बयानों में विरोधाभाष।

हाई कोर्ट ने कहा- पीड़िता के बयानों में विरोधाभाष।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने निचली अदालत की सजा रद्द की।

  2. पीड़िता के बयानों में विरोधाभास मुख्य कारण बना।

  3. मेडिकल रिपोर्ट भी दुष्कर्म साबित नहीं कर पाई।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पिता सहित दो सजायाफ्ता को राहत प्रदान की है। अदालत ने मामले में निचली अदालत की सजा को रद करते हुए दोनों की दोषसिद्धि समाप्त कर दी है।बोकारो की निचली अदालत ने दोनों को पोक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

इसके खिलाफ हरिराम शर्मा और लखीचंद प्रसाद की ओर से हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अदालत ने दोनों अपीलों को स्वीकार करते हुए सजा से बरी कर दिया।

अभियोजन के अनुसार, 15 मार्च 2025 की रात पीड़िता के पिता हरिराम शर्मा उसे डाक्टर के पास ले जाने के बहाने स्कूटी से अपने साथ ले गए थे। आरोप था कि बाद में वह उसे अपने मित्र लखीचंद प्रसाद की कार में ले गए, जहां एक सुनसान पहाड़ी इलाके में उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

शिकायत में दोनों आरोपितों पर पीड़िता के साथ गलत हरकत करने और घटना का खुलासा करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था। ट्रायल के दौरान अभियोजन ने 15 गवाहों के बयान दर्ज कराए।

हालांकि पीड़िता और उसकी मां सहित अधिकांश गवाह अपने पूर्व के बयानों से मुकर गए। पीड़िता ने अदालत में कहा कि उसके साथ दुष्कर्म या छेड़छाड़ की कोई घटना नहीं हुई थी और दोनों आरोपित निर्दोष हैं।

उसकी मां ने भी प्राथमिकी में लिखी बातों का पूरी तरह समर्थन नहीं किया। अदालत ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट कथित दुष्कर्म की घटना को निर्णायक रूप से प्रमाणित नहीं करती।