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सख्त निर्देश के बाद भी झारखंड के 19 जिलों में स्कूल-कालेजों को नहीं मिला अनुदान, सभी DEO पर कार्रवाई की तैयारी

Published: Thu, 29 Oct 2026 01:30 PM (IST)

झारखंड के 19 जिलों में वित्त रहित स्कूलों और कॉलेजों को स्वीकृत अनुदान राशि अभी तक नहीं मिली है, जबकि ...और पढ़ें

जिला शिक्षा पदाधिकारियों को तीन दिनों में भुगतान करने के निर्देश, नहीं तो होगी कार्रवाई।

जिला शिक्षा पदाधिकारियों को तीन दिनों में भुगतान करने के निर्देश, नहीं तो होगी कार्रवाई।

HighLights

  1. 19 जिलों में वित्त रहित संस्थानों को अनुदान नहीं मिला।

  2. विभाग ने 15 अक्टूबर तक राशि वितरण के निर्देश दिए थे।

  3. तीन दिनों में भुगतान न होने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई।

राज्य ब्यूरो, रांची। वित्त रहित स्कूलों, कालेजों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों को अनुदान देने में कई जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह तथा माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद के सख्त निर्देश के बाद भी राज्य के पांच जिलों रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद एवं पूर्वी सिंहभूम में ही अपील के आधार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत अनुदान राशि संबंधित संस्थानों के खाते में हस्तांतरित की जा सकी है।

शेष 19 जिलों में राशि अभी तक हस्तांतरित नहीं हुई। बुधवार को यह मामला संज्ञान में आने के बाद विभागीय सचिव के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इन 19 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर इसके लिए नाराजगी प्रकट की।

इसमें कहा गया है कि अपील आवेदन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 की विभागीय अनुदान समिति द्वारा स्वीकृत अनुदान की राशि छह अक्टूबर को ही जिलों को उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही 15 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से संस्थानों को भुगतान करने एवं इसमें किसी प्रकार की देरी को गंभीरता से लिए जाने के निर्देश दिए गए थे।

रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद तथा पूर्वी सिंहभूम ने लिया एक्शन

इसके बाद भी जानकारी के अनुसार, रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद तथा पूर्वी सिंहभूम जिलों के द्वारा ही संस्थानों को स्वीकृत अनुदान की राशि वितरित की गई है। शेष जिलों द्वारा अब तक उक्त राशि का वितरण संबंधित संस्थानों को नहीं किया गया है, जो विभागीय आदेश की अवहेलना है।

निदेशक ने अन्य जिलों को तीन दिनों में अनुदान की राशि वितरित करने के निर्देश दिए ताकि संस्थान समय पर उपयोगिता प्रमाण के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन कर सकें। उन्होंने इसका अनुपालन नहीं होने पर अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

दरअसल, बुधवार को ही वित्त रहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने इन जिलों में अभी तक अनुदान की राशि वितरित नहीं होने की जानकारी सचिव को दी थी। मोर्चा ने 75 प्रतिशत अनुदान बढ़ाने तथा वित्त रहित संस्थानों की छात्राओं का भी सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने पर शीघ्र निर्णय का भी आश्वासन दिया।

मोर्चा ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए आश्वासन का जिक्र करते हुए इसे लागू करने की मांग की। इसपर सचिव ने कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया है तो उसे पूरा किया जाएगा। इसपर कुछ नीतिगत निर्णय लिए जाने हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करने पर सीएसआर से जुड़ी संस्थाओं ने किया विमर्श

महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग और यूनिसेफ ने मिलकर बुधवार को धुर्वा में राज्य स्तरीय सीएसआर कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी विभागों और अन्य स्टेकहोल्डर्स ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचना और सेवाओं को मजबूत करने के लिए साझेदारी के अवसर तलाशना था।

समाज कल्याण निदेशालय के सहायक निदेशक ने उपस्थित लोगों को विषय की जानकारी दी। विभाग के सचिव ने खनन एवं उद्योग विभाग के साथ समन्वय कर उच्च स्तरीय बैठक और सार्वजनिक-निजी सीएसआर सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।

यूनिसेफ झारखंड के सीएफओ और आइपीई ग्लोबल के राज्य प्रमुख ने पोषण एवं बाल विकास पहलों को प्रभावी बनाने के प्रस्ताव रखे। तकनीकी सत्रों में सीएसआर से आंगनबाड़ी ढांचे को सुदृढ़ करने, साझेदारी माडल और पोषण परिणामों पर चर्चा हुई। कार्यशाला में बेहतर पोषण और विकास के लिए मिलकर काम करने का रोडमैप तय हुआ।