चारा घोटाला में जब्त 1.33 करोड़ सरकार के पास होगी जमा, प्रमोद धानुका से जब्त 9.64 लाख रुपये वापस करे सीबीआई
चारा घोटाले में सरकारी गवाह दीपेश चांडक से जब्त 1.33 करोड़ रुपये अब झारखंड सरकार के पास जमा होंगे। वहीं ...और पढ़ें

चारा घोटाले में सुनवाई के बाद सीबीआइ कोर्ट ने दिया आदेश, 1.33 करोड़ झारखंड सरकार को जाएगी।
HighLights
1.33 करोड़ रुपये 29 साल बाद झारखंड सरकार को मिलेंगे।
प्रमोद धानुका को 9.64 लाख रुपये वापस करने का आदेश।
योगेश चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हुई।
राज्य ब्यूरो, रांची। चारा घोटाले के सरकारी गवाह दीपेश चांडक से जब्त की गई 1.33 करोड़ रुपये की राशि 29 साल बाद अब झारखंड सरकार के पास जमा होगी। सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने इस राशि को झारखंड सरकार को भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह राशि चारा घोटाले के अनुसंधान के दौरान सात और 10 जनवरी 1997 को दीपेश चांडक के आवास से बरामद की गई थी। सीबीआइ के अनुसार, चांडक पर वर्ष 1981 से 1994 के बीच फर्जी आवंटन पत्र, आपूर्ति विपत्र और बिल के आधार पर तत्कालीन बिहार के विभिन्न कोषागारों से 95.99 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का आरोप था।
इस संबंध में चारा घोटाले के कांड संख्या आरसी 52ए/96 में जांच के दौरान उक्त राशि जब्त की गई थी। अदालत के आदेश पर चार जनवरी 2022 को इसे सरकारी बैंक खाते में जमा कराया गया था। दीपेश चांडक ने अब तक इस राशि पर अपना दावा नहीं किया।
सुनवाई के दौरान सीबीआइ के अधिवक्ता ने क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट, 1944 की धारा 4 और 5 के तहत राशि झारखंड सरकार को सौंपने को कहा। उन्होंने आरसी 20ए/96 में 30 सितंबर 2013 को आए फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें बिना दावे वाली जब्त संपत्ति संबंधित राज्य सरकार को देने का निर्देश था।
अदालत ने सरकारी गवाह दीपेश चांडक का पक्ष भी सुना। उन्होंने राशि पर कोई दावा नहीं किया। इसके बाद अदालत ने पूरी राशि झारखंड सरकार के पक्ष में भुगतान करने का आदेश पारित किया।
जब्त 9.64 लाख रुपये सीबीआई को वापस करने का निर्देश
सीबीआई की विशेष अदालत ने छापेमारी के दौरान जब्त किए गए 9.64 लाख रुपये की राशि उसके दावेदार प्रमोद कुमार धानुका को वापस करने का आदेश दिया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश देबाशीष महापात्रा की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उक्त आदेश दिया। इसको लेकर प्रमोद कुमार धानुका की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह इस मामले में आरोपित नहीं हैं।
12 जुलाई 2017 को उनके परिसर में सीबीआई की छापेमारी के दौरान कार्यालय में रखे 9,64,410 रुपये जब्त किए गए थे। याचिकाकर्ता ने राशि को वैध स्रोत से अर्जित बताते हुए वापसी की मांग की थी। सीबीआइ की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि राशि प्रमोद धानुका और उनके भाई व मामले के सह-आरोपित सुबोध धानुका के आवास से जब्त हुई थी।
राशि 26 जुलाई 2017 को कारपोरेशन बैंक, सीजीओ काम्प्लेक्स शाखा, नई दिल्ली में जमा कराई गई थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात राज्य मामले में दिए निर्देशों को ध्यान में रखते हुए राशि रिलीज करने का आदेश दिया। इसके लिए समान राशि का क्षतिपूर्ति बांड और दो जमानतदार देने होंगे।
ईएमआइ नहीं देने को नहीं मिली राहत
अपर न्यायायुक्त देवाशीष महापात्रा की अदालत ने वाहन फाइनेंस में धोखाधड़ी और गड़बड़ी से जुड़े मामले में आरोपित योगेश चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि केस डायरी और गवाहों के बयानों से प्रथम दृष्टया आरोपित की संलिप्तता स्पष्ट होती है और वह जांच में सहयोग भी नहीं कर रहा है। मामला रातू थाना से जुड़ा है।
प्रतीक ऑटोमोबाइल्स के जीएम अनूप शुक्ला की शिकायत पर दर्ज इस मामले में महिंद्रा वैन मैक्स एचडी नेक्स्ट जेन वाहन की बिक्री और फाइनेंस प्रक्रिया में गड़बड़ी व ईएमआइ भुगतान न होने का आरोप है।
