झारखंड में गरमाया NPU में धांधली का मामला, वित्त मंत्री ने की कुलपति DK सिंह को हटाने की मांग
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यपाल से नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह को पद से हटाने की मांग की है।

राज्यपाल से मिले वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर। फाइल फोटो
HighLights
वित्त मंत्री ने कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह को हटाने की मांग की।
विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि अंकेक्षण रिपोर्ट में हुई।
परीक्षा कार्यों में 2.50 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान हुआ।
राज्य ब्यूरो, रांची। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मंगलवार को लोक भवन में राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर डॉ. दिनेश कुमार सिंह को पलामू स्थित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति पद से हटाने की मांग की है।
उन्होंने आशंका जताई है कि उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय में जो अनियमितताएं हुई हैं, उनसे संबंधित साक्ष्य को वह नष्ट कर सकते हैं। इसलिए उनके कुलपति पद के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार वापस लेने की जगह उन्हें पद से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए। मंत्री ने इसे लेकर राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा है।
दरअसल, वित्त विभाग के अंकेक्षण में डॉ. दिनेश कुमार सिंह द्वारा विश्वविद्यालय में कई अनियमितताएं की जाने की पुष्टि हुई है। साथ ही राज्यपाल के निर्देशों की अवहेलना करते हुए अपने पसंद के अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दे दी गई।
ऐसा उन्होंने किसी खास संवेदक को लाभ पहुंचाने के लिए किया। इसकी जानकारी मिलने के बाद राज्यपाल ने उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी है।
इधर, वित्त मंत्री ने राज्यपाल को मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों पर रोक लगाने के पांच घंटे के अंतराल में डॉ. सिंह ने रजिस्ट्रार का ट्रांसफर कर दिया और किसी अन्य को रजिस्ट्रार नियुक्त कर दिया है।
वित्त मंत्री की शिकायत पर राज्यपाल ने कराया था अंकेक्षण
वित्त मंत्री ने पिछले वर्ष राज्यपाल से मिलकर नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में अनियमितता की जानकारी दी थी, जिसके बाद राज्यपाल के निर्देश पर विश्वविद्यालय का विशेष अंकेक्षण कराया गया। वित्त विभाग द्वारा कराए गए अंकेक्षण में विश्वविद्यालय में भारी अनियमितता की पुष्टि हुई।
अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार परीक्षा कार्यों के संचालन के मद में लगभग 2.50 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान किया गया। वर्तमान कुलपति पर नियम विरुद्ध नियुक्ति तथा बार-बार अवधि विस्तार का विस्तृत उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में हुए विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में 79.35 लाख रुपये राज्यपाल सचिवालय से बजट की स्वीकृति के बिना खर्च कर दिए गए। इसी तरह की अन्य अनियमितताएं भी हुईं। मंत्री ने इन सभी की जानकारी राज्यपाल को दी है।
