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झारखंड सरकार का वित्तीय हाल: बजट का आधा भी नहीं हुआ खर्च, वित्त मंत्री के कड़े निर्देश— 60 दिनों में निपटाएं निविदाएं

Published: Wed, 28 Oct 2026 09:30 PM (IST)

झारखंड के वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजनाओं पर धीमी खर्च गति पर चिंता व्यक्त की है, जो ...और पढ़ें

झारखंड में धीमी खर्च रफ्तार से वित्त मंत्री चिंतित, विकास आयुक्त को लिखा पत्र।

झारखंड में धीमी खर्च रफ्तार से वित्त मंत्री चिंतित, विकास आयुक्त को लिखा पत्र।

HighLights

  1. वित्तीय वर्ष 2026-27 में मात्र 29.38% बजट खर्च हुआ।

  2. वित्त मंत्री ने खर्च बढ़ाने हेतु विकास आयुक्त को पत्र लिखा।

  3. निविदाओं को 60 दिनों में निपटाने का सख्त निर्देश जारी।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में वित्त मंत्री को खर्च की सुस्त रफ्तार से चिंता होने लगी है। मंत्री ने अब खर्च की रफ्तार बढ़ाने के लिए विकास आयुक्त को पत्र लिखा है। उन्हाेंने लिखा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक योजनाओं पर मात्र 29.38% राशि ही खर्च हुई है।

22 अक्टूबर 2026 तक पुनरीक्षित योजना बजट के 1,06,200.94 करोड़ रुपये के विरुद्ध मात्र 31,196.72 करोड़ रुपये (करीब 29.38%) ही खर्च किए गए हैं। वित्तीय वर्ष के छह माह 22 दिन पूरे होने के बावजूद यह आंकड़ा चिंताजनक है।

50% खर्च का लक्ष्य, अब तक आधे से भी कम

मंत्री ने उल्लेख किया है कि वित्त विभाग की ओर से वर्ष 2015 में ही ऐसा आदेश जारी हुआ था कि 30 सितंबर तक छह माह बीतने पर 50% राशि खर्च कर ली जानी चाहिए।

हालांकि ऐसा हो नहीं पाया है। उन्होंने लिखा है कि 22 अक्टूबर 2026 तक विभिन्न विभागों की खर्च राशि की समीक्षा में सामने आया है कि कई महत्वपूर्ण विभागों में खर्च प्रतिशत बेहद कम है।

पिछले वित्तीय वर्ष में 76% राशि ही हुई खर्च : मंत्री ने इस बात का उल्लेख किया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी कुल योजना बजट के हिसाब से 76% राशि ही खर्च हो पाई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार राज्य में वित्तीय प्रबंधन/अनुशासन के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन योजना का पूर्ण उपयोग न हो पाना चिंता का विषय है।

अपने पत्र में मंत्री ने विकास आयुक्त से कम खर्च करनेवाले विभागों के सचिवों के साथ बैठक कर कम खर्च के कारणों की समीक्षा करने का आग्रह किया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि दिसंबर 2026 तक योजना मद की 1,06,200 करोड़ की कणार्कित राशि के विरुद्ध लगभग 75,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएं।

वित्त मंत्री ने आगे लिखा है कि पथ निर्माण और निर्माण कार्य वाले अन्य विभागों में निविदा के निष्पादन में छह महीने से डेढ़ वर्ष तक समय लग जाता है। इस कारण से योजना की राशि खर्च नहीं हो पाती। ऐसे विभागों को यह निर्देश दिया गया है कि वे हाल में 60 दिनों के अंदर निविदा का निष्पादन कर लें।

विभागवार खर्च का विवरण

  • पेयजल एवं स्वच्छता विभाग : सबसे कम 4.88% खर्च
  • ग्रामीण विकास विभाग : 11.59% खर्च
  • पथ निर्माण विभाग : 19.79% खर्च
  • कृषि विभाग : 21.40% खर्च
  • शहरी विकास विभाग : 15.94% खर्च।
  • अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण : 15.69% खर्च।
  • स्वास्थ्य विभाग : 24.81% खर्च।
  • उच्च एवं तकनीकी शिक्षा : 26.17% खर्च।
  • खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले : 16.54% खर्च।