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झारखंड लोकायुक्त ने रिपोर्ट मांगी तब खुली राजस्व और भूमि सुधार विभाग की नींद, चार सदस्यीय समिति की गठित

Published: Sat, 11 Jul 2026 06:00 AM (IST)Updated: Sat, 11 Jul 2026 09:40 AM (IST)

लोकायुक्त द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने धनबाद के हीरापुर मौजा में सरकारी जमीन ...और पढ़ें

लोकायुक्त ने धनबाद जमीन हड़प मामले में कृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी।

लोकायुक्त ने धनबाद जमीन हड़प मामले में कृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी।

HighLights

  1. लोकायुक्त ने धनबाद जमीन हड़प मामले में कृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी।

  2. राजस्व विभाग ने दोषियों की पहचान हेतु चार सदस्यीय समिति गठित की।

दिलीप कुमार, रांची। धनबाद के हीरापुर मौजा में करोड़ों रुपये की 18 कट्ठा सरकारी जमीन को अफसर व जमीन माफिया के माध्यम से हड़पने के मामले में वर्तमान लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता द्वारा मामले में की गई रिपोर्ट मांगे जाने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की नींद खुली है।

विभाग ने मामले में दोषियों की पहचान करने के लिए अपर सचिव फैज अक अहमद मुमताज की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की है। समिति के सदस्यों में संयुक्त सचिव रामवृक्ष महतो, भू-अर्जन, भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय झारखंड के उप सचिव सह उप निदेशक सुधीर कुमार दास तथा विभाग के अवर सचिव शंभु कुमार सिंह सम्मिलित हैं।

विभाग ने समिति को दोषियों को चिह्नित करने, सरकारी जमीन की वापसी कराने की कार्रवाई करते हुए 30 दिनों के भीतर मंतव्य सहित रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

इस कार्य में धनबाद के अपर समाहर्ता सहयोग व समन्वय करेंगे और राजस्व पर्षद के 12 दिसंबर 2023 के रिवीजन वाद में दिए गए आदेश से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएंगे। यह निर्णय राजस्व पर्षद के आदेश के तीन वर्ष के बाद लिया गया है वह भी तब, जब लोकायुक्त ने फाइल पर खोजबीन शुरू की।

लोकायुक्त ने तीन जुलाई को मांगी थी कृत कार्रवाई रिपोर्ट

लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने इस केस से संबंधित अपनी पुरानी लंबित फाइल के निष्पादन के क्रम में उक्त मामले की समीक्षा के बाद इसी तीन जुलाई को राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव, धनबाद के डीसी व अन्य संबंधित अधिकारियों से कृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी।

पूरा मामला सबसे पहले वर्ष 2011 के मार्च महीने में लोकायुक्त के सामने आया था। शिकायतकर्ता हीरापुर दुर्गा मंदिर के पूर्व अधीक्षक सूर्यनारायण झा ने बताया था कि झारखंड सरकार के स्वामित्व वाले गैर आबाद जमीन (सरकारी जमीन) धनबाद के हीरापुर मौजा, थाना नंबर-7, खाता नगरपालिका प्लाट नंबर 2907, 2908 व 2906 की 18 कट्ठा जमीन को राजस्व अधिकारी की मिलीभगत से एक व्यक्ति जयप्रकाश खेतान के पक्ष में दाखिल खारिज किया गया था।

दाखिल खारिज व अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर माइंस एरिया डवलपमेंट अथारिटी (माडा) के तत्कालीन पदाधिकारियों ने भी जयप्रकाश खेतान को बहुमंजिली व्यवसायिक भवन निर्माण के लिए स्वीकृति दे दी थी।

लोकायुक्त की अनुशंसा पर सुनवाई के बाद राजस्व पर्षद ने कमिश्नर की रिपोर्ट की थी खारिज

वर्ष 2011 में वाद दायर होने के बाद लोकायुक्त ने धनबाद के तत्कालीन डीसी से पूरे मामले में जांच रिपोर्ट मांगी थी। धनबाद के डीसी ने जमीन हड़पने का मामला सही पाया था और दाखिल खारिज रद करने की अनुशंसा सहित दोषियों पर कार्रवाई के लिए आदेश जारी किया था और इससे संबंधित रिपोर्ट लोकायुक्त कार्यालय को दी थी।

इसी बीच धनबाद के तत्कालीन डीसी की जांच रिपोर्ट को उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल हजारीबाग के कमिश्नर ने पलटते हुए 11 जनवरी 2017 को आरोपितों के पक्ष में ही आदेश पारित कर दिया था।

लोकायुक्त ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 22 अगस्त 2017 को अपना आदेश दिया था, जिसमें लिखा था कि उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल हजारीबाग के आयुक्त ने अपने आदेश में कहीं भी प्रश्नगत भूमि के संबंध में किसी प्रकार की कोई चर्चा नहीं की और न हीं अपना कोई स्वतंत्र मत निष्कर्ष पर पहुंचने से पूर्व अंकित किया था।

बिना किसी समीक्षा के आयुक्त ने धनबाद के उपायुक्त के आदेश को निरस्त किया था। इसके बाद ही लोकायुक्त ने राजस्व पर्षद के सदस्य से मंतव्य देने या अपेक्षित कार्रवाई की अनुशंसा की थी। लोकायुक्त की अनुशंसा पर ही राजस्व पर्षद ने 2018 में रिवीजन वाद संख्या 11/2018 दर्ज की।

इस वाद में ही 12 दिसंबर 2023 को राजस्व पर्षद के तत्कालीन सदस्य अमरेंद्र प्रताप सिंह ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त के 11 जनवरी 2017 के आदेश को खारिज किया था। उन्होंने अपने आदेश में लोकायुक्त के आदेश की भी सराहना की थी कि उनकी सुनवाई में ही इतना बड़ा मामला उजागर हुआ था।