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    Jharkhand Politics: तस्वीर की आड़ में राजनीति, ED की छापेमारी के बाद कोयला कारोबारी से करीबी का मुद्दा बना पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर साध रहे निशाना

    By Pradeep Singh Edited By: Kanchan Singh
    Updated: Sat, 29 Nov 2025 02:25 PM (IST)

    झारखंड में कोयला घोटाले के बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की कोयला कारोबारी एलबी सिंह के साथ एक पुरानी तस्वीर वायरल होने से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन भाजपा पर कोयला माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगा रहा है, जबकि मरांडी ने इसे हास्यास्पद बताया है। इस मुद्दे से भाजपा के भीतर भी हलचल है और शीतकालीन सत्र में इसके और गरमाने की संभावना है।

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    भाजपा के प्रदेश अध्क्ष के साथ कोयला कारोबारी एलबी सिंह। (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में कोयला घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीते दिनों धनबाद समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान मुख्य आरोपित कोयला कारोबारी एलबी सिंह के आवास और कार्यालयों पर एक साथ दबिश दी गई।

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    ईडी की टीम ने घंटों की तलाशी के बाद कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए। यह कार्रवाई कोयला अवैध खनन और लेवी वसूली के पुराने मामले में तेजी से आगे बढ़ रही जांच का हिस्सा है।

    ईडी की कार्रवाई के बाद इंटरनेट मीडिया पर भाजपा झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के साथ कोयला कारोबारी एलबी सिंह की एक पुरानी तस्वीर वायरल हो गई। तस्वीर में दोनों एक साथ दिख रहे हैं।

    सत्तारूढ़ गठबंधन ने इसे मुद्दा बना लिया और भाजपा पर कोयला माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि बाबूलाल मरांडी भाजपा के लिए बोझ बन चुके हैं। पार्टी को उनके बारे में सोचना चाहिए। भाजपा हार की हताशा में सिर्फ बढ़-चढ़कर आरोप लगाती है।

    इसके जवाब में बाबूलाल मरांडी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम की तस्वीर को राजनीतिक हथियार बनाना हास्यास्पद है। सत्तापक्ष पहले अपने उन लोगों पर कार्रवाई करे जो उनके इशारे पर समानांतर सरकार चलाते हैं और वसूली करते हैं।

    बताया जाता है कि भाजपा के भीतर भी असमंजस की स्थिति है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार इस तस्वीर से पार्टी में हलचल है। कई नेता इसे अनावश्यक विवाद मान रहे हैं और आलाकमान से मार्गदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं।

    कुछ का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष को पहले ही इस तस्वीर पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए था। आगामी विधानसभा शीतकालीन सत्र में सत्तारूढ़ गठबंधन इस तस्वीर को बड़ा हथियार बनाएगा। भाजपा के कोयला माफिया से कथित संबंधों को लेकर घेरने की पूरी तैयारी है।